भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार को ऐतिहासिक करतारपुर गलियारे को चालू करने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इससे अब भारत के सिख श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित पवित्र दरबार साहिब तक जा पाएंगे. बीच में भारत-पाकिस्तान तनाव के चलते इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि हो सकता है कि दोनों देश इस संबंध में हो रही बातचीत को रोक दें. लेकिन, दोनों देशों ने तनाव से प्रभावित हुए बिना समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

गलियारे के समझौते पर हस्ताक्षर करने संबंधी कार्यक्रम का आयोजन नरोवाल में भारत-पाकिस्तान सीमा पर करतारपुर जीरो प्वाइंट पर हुआ. इस समझौते के साथ ही गलियारे को चालू करने में आ रही मुख्य कानूनी बाधा को दूर कर लिया गया है. भारत की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव एससीएल दास ने, जबकि पाकिस्तान की तरफ से पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने समझौते पर दस्तखत किए.

समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद पाकिस्तानी प्रवक्ता फैसल मोहम्मद ने कहा, ‘करतारपुर गलियारे को लेकर समझौते पर पहुंचना कभी आसान नहीं था. भारत के साथ हमारे तनाव भरे संबंधों के चलते नि:संदेह यह बहुत ही कठिन बातचीत थी.’ उन्होंने बताया कि समझौते के तहत गलियारा सप्ताह के सातों दिन सूर्योदय से सूर्योस्त तक खुला रहेगा और हर रोज कुल पांच हजार भारतीय सिख करतार पहुंचेंगे और उसी दिन वापस चले जाएंगे. समझौते पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद श्रद्धालुओं का ऑनलाइन पंजीकरण शुरू हो गया है. हालांकि, करतारपुर जाने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को 20 डॉलर शुल्क का भुगतान करना होगा. भारत ने पाकिस्तान से श्रद्धालुओं से शुल्क नहीं वसूलने का आग्रह किया था, लेकिन पाकिस्तान ने इसे नहीं माना.

गुरुद्वारा दरबार साहिब में सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताए थे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान गुरु नानक देव की 550वीं जयंती से पहले नौ नवंबर को इस गलियारे का औपचारिक उद्घाटन करेंगे. करतारपुर गलियारे के भारतीय क्षेत्र में आने वाले हिस्से का शिलान्यास उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने पिछले साल नवंबर में पंजाब के गुरदासपुर जिले में किया था.