निर्देशक: फरहाद सामजी
कलाकार: अक्षय कुमार, कृति सेनन, रितेश देशमुख, बॉबी देओल, कृति खरबंदा, पूजा हेगड़े, चंकी पांडेय
रेटिंग: 0.5/5

‘हाउसफुल 4’ हर तीसरे साल आने वाली उस सीरीज की चौथी कड़ी है जिसके नहीं होने से दुनिया को कोई फर्क नहीं पड़ना था. यह भी कोई बताने वाली बात नहीं है कि यह फिल्म गोलमाल, मस्ती या धमाल फ्रेंचाइज वाली लीग की कॉमेडी फिल्म है और इन फिल्मों में ढेर सारे कन्फ्यूजन और उसके चलते पैदा हुई मुसीबतों के जरिए हास्य रचने की (नाकाम) कोशिश की जाती है. ‘हाउसफुल 4’ में खास यह है कि इसने शायद खुद ही यह मान लिया था कि यह दर्शकों को हंसा पाने में कामयाब नहीं होने वाली है. इसलिए फिल्मकार ने इस बार पुनर्जन्म का कॉन्सेप्ट चुना और ‘हाउसफुल 4’ की आधी कहानी को 600 साल पहले के वक्त में प्लेस कर दिया. यह और बात है कि इसके बासीपन में कोई ताजापन तो दूर कुछ अतिपुरातन भी वे नहीं जोड़ पाए हैं.

फिल्म की कहानी कुछ यूं है कि किरदारों का एक झुंड पुनर्जन्म लेकर दोबारा दुनिया में आया है. कुछ ऐसा होता है इन किरदारों को अपना पिछला जन्म याद आ जाता है और वे इस बार अपनी पिछली ज़िंदगी में की गई गलतियों को सुधारने की कोशिश करने में लग जाते हैं. लेकिन अफसोस कि फिल्म के बारे में ऐसा कुछ नहीं कहा जा सकता है. वह बार-बार की गई गलतियों को एक बार फिर उतनी ही बेशर्मी से दोहराती है और एक महापकाऊ फिल्म बनकर रह जाती है. ध्यान दें कि इन गलतियों में फिल्म के सेक्सिस्ट-होमोफोबिक जोक्स और सूसू-पॉटी ह्यूमर को नहीं गिना गया है, उन पापों का हिसाब अलग से किया जाएगा.

अभिनय पर आएं तो अक्षय कुमार, बॉबी देओल और रितेश देशमुख वही करते हैं जो हाउसफुल सीरीज की पिछली फिल्मों का हिस्सा बनकर करते रहे हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो वे परदे पर जो कुछ भी करते हैं, उसे हम अभिनय छोड़कर जो चाहे कह सकते हैं. मसलन - रोना, चिल्लाना, बिसूरना, खिखियाना, हिनहिनाना, मिनमिनाना वगैरह-वगैरह. फिल्म की नायिकाएं कृति सैनॉन, कृति खरबंदा और पूजा हेगड़े, इसमें बस मुस्कुराने-लजाने और सेक्सिस्ट चुटकुलों का शिकार होने के लिए आती-जाती हैं. ‘हाउसफुल 4’ में इन्हें मिली तवज्जो का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि परदे पर इस वक्त कौन सी अभिनेत्री है, कई बार इसका पता भी ठीक से नहीं चल पाता है.

फिल्म में हाउसफुल सीरीज का जरूरी किरदार ‘आखिरी पास्ता’ यानी चंकी पांडेय आपको एक बार फिर देखने को मिलता है. आश्चर्यजनक है कि यह किरदार 1419 में भी था! उस समय तक भारतवासियों ने पास्ता का शायद नाम भी नहीं सुना होगा. लेकिन अगर ‘हाउसफुल 4’ में हम हिस्टोरिकल एक्यूरेसी देखने बैठ जाएंगे तो हमसे ज्यादा मूर्ख शायद ही किसी और को समझा जाएगा! खैर, चंकी पांडेय के अलावा, यहां पर अपने जाने-पहचाने क्रीपी-कपटी विलेन के किरदार में रंजीत और अति के ऑफेंसिव मसखरे जॉनी लीवर भी हैं. जो उतने ही अच्छे या बुरे हैं जितने फिल्म के बाकी किरदार हैं.

‘हाउसफुल 4’ का निर्देशन हाउसफुल सीरीज की शुरूआत करने वाले साजिद खान ही कर रहे थे लेकिन मीटू आंदोलन के दौरान यौन शोषण के आरोपों से घिरने के बाद, उन्होंने यह फिल्म छोड़ दी. इसके बाद फिल्म के निर्देशन की बागडोर फरहाद सामजी ने संभाली. फरहाद इससे पहले अपने भाई साजिद सामजी के साथ मिलकर ‘हाउसफुल3’ का निर्देशन भी कर चुके हैं जो इससे कई डिग्री बेहतर फिल्म थी. अगर फरहाद सामजी ने केवल इस फिल्म का निर्देशन किया होता तो शायद उनसे थोड़ी कम शिकायत होती लेकिन वे इस फिल्म की लेखकीय टीम का हिस्सा भी रहे हैं. वही टीम जिसके लेखन की गहराई की तुलना केवल और केवल गटर के गहरेपन से की जा सकती है. इस तुलना के लिए पाठक हमें माफ करें लेकिन यह भी ‘हाउसफुल 4’ देखने का हैंगओवर है!