भाजपा हरियाणा में सरकार बनाने के लिये हरियाणा लोकहित पार्टी के विधायक गोपाल कांडा का समर्थन नहीं लेगी. पीटीआई के मुताबिक केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद यह जानकारी दी है. उन्होंने पत्रकारों को बताया, ‘मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि भाजपा कांडा का समर्थन नहीं लेने जा रही है.’ गोपाल कांडा ने शुक्रवार को कहा था कि उन्होंने भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने का फैसला किया है.

गोपाल कांडा द्वारा भाजपा को समर्थन की पेशकश करने के बाद से पार्टी कांग्रेस के निशाने पर है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि भाजपा दोमुंही बात करती है. उनका कहना था, ‘मुझे लगता है कि (प्रधानमंत्री मोदी) नरेंद्र मोदी और (केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रमुख) अमित शाह के उन बयानों को आपको देखना चाहिए जब गोपाल कांडा हरियाणा में मंत्री थे और उनके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद हमने उन्हें इस्तीफे के लिये मजबूर किया तथा उन्हें मंत्री पद से भी हटा दिया था.’

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने ट्वीट कर पार्टी को आगाह किया था. उन्होंने कहा कि हरियाणा में सरकार के गठन के लिये गोपाल कांडा का समर्थन लेने से प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की साफ छवि को नुकसान पहुंच सकता है.

हरियाणा की त्रिशंकु विधानसभा में 40 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है, जबकि कांग्रेस को 31 सीटें मिली हैं. दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के पास 10 विधायक हैं और आईएनएलडी के पास एक विधायक है.

सिरसा से विधायक गोपाल कांडा को एक एयरहोस्टेस को आत्महत्या के लिये उकसाने के आरोप में 2012 में गिरफ्तार किया गया था. यह एयरहोस्टेस उनकी तत्कालीन विमानन कंपनी में काम करती थी, जो अब बंद हो चुकी है. इससे पहले भी उनके खिलाफ बलात्कार के आरोप में मामला दर्ज किया गया था. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में गोपाल कांडा हरियाणा के गृह मंत्री थे. उनके पास शहरी, उद्योग और वाणिज्य मामलों के विभाग का भी प्रभार था. विवाद होने के बाद उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था.