दिल्ली पर धुंध का साया लगातार जारी है. बुधवार को भी राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में रहा. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार आज सुबह 11 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 416 था. सीपीसीबी के अनुसार मंगलवार को एक्यूआई 414 था जो सोमवार के एक्यूआई 397 से खराब था. दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है.

एक्यूआई अगर 0-50 के बीच है तो उसे ‘अच्छा’ माना जाता है. 51-100 के बीच इसे ‘संतोषजनक’, 101-200 के बीच ‘सामान्य’, 201-300 के बीच ‘खराब’, 301-400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401-500 होने पर ‘गंभीर’ माना जाता है. अगर एक्यूआई 500 से ऊपर है तो उसे ‘गंभीर और आपातकालीन’ श्रेणी में माना जाता है.

इससे पहले खबर आई थी कि दीवाली के बाद दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में आई गिरावट पिछले तीन साल के मुकाबले आधी रही. सोमवार सुबह साढ़े दस बजे दिल्ली में हवा का गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 345 था. पिछले साल दीवाली के बाद दिल्ली में एक्यूआई 600 को पार कर गया था जो कि सुरक्षित स्तर का 12 गुना था. 2017 में दीवाली के बाद एक्यूआई 367 और 2016 में 425 पर पहुंच गया था. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक इस बार दीवाली के बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता पास के गाजियाबाद (375), ग्रेटर नोएडा (356), गुड़गांव (352) और नोएडा (375) से बेहतर रही.

सुप्रीम कोर्ट ने इस बार पटाखे फोड़ने के लिए दो घंटे की समय-सीमा तय कर रखी थी. हालांकि इसका राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में उल्लंघन हुआ. हर साल दीवाली के बाद हवा की गुणवत्ता बेहद खतरनाक हो जाने के मद्देनजर 2018 में शीर्ष अदालत ने प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया था और केवल हरित पटाखे (ग्रीन क्रैकर्स) जलाने की मंजूरी दी थी.