जर्मनी की चांसलर (प्रधानमंत्री) अंगेला मेर्कल अपने तीन मंत्रियों और आठ राज्य मंत्रियों के साथ भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर, 31 अक्टूबर की रात को, नयी दिल्ली पहुंच गई हैं. दोनों देशों की सरकारों के बीच नियमित द्विवार्षिक वार्ताओं का यह पांचवां दौर है. इस दौरान 20 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना जतायी जा रही हैं. बर्लिन से नयी दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले अपने एक विशेष वीडियो पोडकास्ट में अंगेला मेर्कल ने अपनी इस यात्रा और उसके दौरान होने वाली वार्ताओं के विषयों पर प्रकाश डाला.

चांसलर अंगेला मेर्कल ने कहा, ‘भारत की यह मेरी चौथी यात्रा होगी. मुझे खुशी है कि वहां मैं भारत के प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी से पुनः मिलूंगी और उनके साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों के बारे में बातें करूंगी. सरकारों के बीच मंत्रिमंडलीय स्तर के परामर्शों से हमें अपनी नीतियों के संपूर्ण विस्तार के साथ भविष्य के प्रश्नों पर बातें करने का अवसर मिलता है. हमारी मंत्रणाओं के केंद्र में इस बार आर्थिक और व्यापारिक संबंध, नवाचार (इनोवेशन) और डिजिटलीकरण, जलवायुरक्षा और सतत विकास होंगे.’

जर्मनी के लिए भारत के महत्व को रेखांकित करते हुए जर्मन चांसलर ने अपने इस वीडियो पोडकास्ट में कहा, ‘भारत एक अरब 30 करोड़ लोगों का देश और संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. भारत के साथ हम मुख्यतः आर्थिक क्षेत्र में सहयोग चाहते हैं. भारत के महानगरों और ग्रामीण अंचलों का अपना अलग महत्व है. भारत में ऐसे कई शहर हैं, जहां एक करोड़ से भी अधिक निवासी हैं. इस संदर्भ में हम स्मार्ट सिटी, नवीकरणीय ऊर्जा-स्रोतों और आवागमन (मोबिलिटी) के नये रूपों के बारे में बातें करना चाहते हैं. इसके अतिरिक्त हम इस बारे में भी बातें करेंगे कि जलवायुरक्षा और सतत विकास को अपने संबंधों में हम किस प्रकार बेहतर ढंग से साकार कर सकते हैं. हम विदेश और रक्षा नीति से जुड़े प्रश्नों पर भी चर्चा करेंगे. कहने का तात्पर्य यह है कि हमारी वार्ताओं का एक विस्तृत आयाम होगा.’

अंगेला मेर्कल इस पोडकास्ट में भारत के बारे में अपने निजी विचारों का उल्लेख करने से भी नहीं चूकीं. उनका कहना था, ‘भारत अनेक विविधताओं और क्षेत्रीय बहुरूपताओं का देश है. मुझे उसका हिंसामुक्त इतिहास, लोकतंत्र और शांति के लिए अहिंसक आंदोलनों की उसकी परंपरा – डेढ़ सौ वर्ष पूर्व जन्मे महात्मा गांधी जिसके प्रतीक हैं – बहुत प्रभावित करती है. आज के भारत में उसके विकास की गति भी मुझे बहुत प्रभावित करती है. भारत ने पिछले वर्षों में, डिजिटलीकरण की दिशा में न केवल अपने शहरी इलाकों में तेज़ी से विकास किया है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी ऐसा ही हो रहा है. हम सभी यह भी जानते हैं कि भारत के पास विकास की और अधिक क्षमताएं हैं. इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम जर्मन, जो यूरोपीय संघ के भीतर भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, उसके साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को भविष्य में भी सुदृढ़ करते रहें. हम भारत से सीखें, पर साथ ही अपने तकनीकी विकास को भी भारत में दिखायें. मेरा समझना है कि यह दोनों देशों के लिए लाभकारी (विन-विन) स्थिति होगी.”

इस यात्रा में जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास भी चांसलर अंगेला मेर्कल के साथ हैं. एक नवंबर का दिन इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण होगा. जर्मन चांसलर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक विषयों पर नयी दिल्ली में गोलमेज़ वार्ताएं होंगी. इनमें जर्मनी के उद्योगमंत्री पेटर अल्टमायर को भी भाग लेना था, पर वे जर्मन चांसलर के साथ नहीं जा सके. भारी-भरकम शरीर वाले अल्टमायर मंगलवार 29 अक्टूबर को एक सभा में भाषण देने के बाद मंच से नीचे उतरते समय लडखड़ाकर गिर गये. उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. डॉक्टरों ने पाया कि कई जगहों पर घाव लगने के साथ-साथ उनकी नाक की हड्डी भी टूट गयी है. अब इस यात्रा में उनका प्रतिनिधित्व उनके राज्यमंत्री कर रहे हैं.

मंगलवार को ही जर्मनी में एक और अप्रिय घटना हुई. जर्मनी के चौथे सबसे बड़े शहर कोलोन के केंद्र में स्थित एक व्यस्त रेलवे स्टेशन पर एक बहुत बड़ा पोस्टर देखा गया. एक बड़े-से विज्ञापन-फलक पर चिपकाये गये उस पोस्टर पर जर्मनी की घोर दक्षिणपंथी पार्टी ‘एएफ़डी’ (ऑल्टर्नेटिव फॉर जर्मनी / जर्मनी के लिए विकल्प) के अध्यक्ष और थ्युरिंगिया राज्य में उसके स्थानीय नेता के फ़ोटुओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी फ़ोटो छपा था. पोस्टर पर ‘एएफ़डी’ का लोगो और उससे संपर्क करने का पता लिखा था. इस पोस्टर में नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल की तुलना हिटलर से की गई थी.

ख़बर मिलने पर पुलिस ने उसी दिन पोस्टर को हटा दिया. पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर कोलोन में ‘एएफ़डी’ के प्रतिनिधि ने कहा, ‘हमारा इस ग़ंदे काम से कोई लेना-देना नहीं है. हम हिटलर जैसे पापियों से कोई वास्ता नहीं रखना चाहते.’

कुछ लोगों का अनुमान है कि चांसलर मेर्कल की चौथी भारत यात्रा से ठीक पहले, भारत के प्रधानमंत्री को ‘एएफ़डी’ जैसी घोर दक्षिणपंथी पार्टी के नेताओं के साथ दिखाने और उनके दूसरे कार्यकाल को हिटलर के साथ जोड़ने वाला यह पोस्टर, संभवतः किसी ऐसे भारतीय या जर्मन संगठन का काम होना चाहिये, जो नरेंद्र मोदी और अंगेला मेर्कल से घृणा करता है. जर्मनी में रहकर ऐसा काम करने का किसी और के पास कोई कारण नहीं हो सकता. संभावना यही अधिक देखी जा रही है कि इस पोस्टर के पीछे किसी घोर वामपंथी संगठन का हाथ है. वह जर्मनी में रहने वाले किन्हीं मोदी-विरोधियों का समूह भी हो सकता है.