देश की राजधानी पर दिल्ली पर छायी जहरीली धुंध की चादर शुक्रवार को और गहरी हो गई. कल के मुकाबले प्रदूषण का स्तर लगभग 50 अंक बढ़ गया और समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 459 पर पहुंच गया. पीटीआई के मुताबिक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के एक अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष जनवरी के बाद से गुरुवार की रात पहली बार एक्यूआई ‘बेहद गंभीर’ और ‘आपात’ श्रेणी में पहुंच गया. अधिकारी ने बताया कि यदि वायु गुणवत्ता 48 घंटे से अधिक अवधि तक ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में बनी रहती है तो ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के तहत आपात उपाय किए जाते हैं. सम-विषम योजना, ट्रकों के प्रवेश और निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध और स्कूल बंद करना इनमें शामिल हैं.

दिल्ली में सुबह साढ़े आठ बजे शहर का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 459 था. राजधानी में स्थित सभी 37 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों ने शुक्रवार की सुबह दिल्ली का एक्यूआई ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया. देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहर गाजियाबाद में पीएम 2.5 का स्तर 493 रहा. ग्रेटर नोएडा (480), नोएडा (477) और फरीदाबाद (432) में भी हवा में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक रहा.

एक्यूआई जब 0-50 होता है तो इसे ‘अच्छी’ श्रेणी का माना जाता है. 51-100 को ‘संतोषजनक’, 101-200 को ‘मध्यम’, 201-300 को ‘खराब’, 301-400 को ‘अत्यंत खराब’, 401-500 को ‘गंभीर’ और 500 से ऊपर एक्यूआई को ‘बेहद गंभीर और आपात’ श्रेणी का माना जाता है. सर गंगाराम अस्पताल में फेफड़ों के सर्जन डॉ अरविंद कुमार ने कहा, ‘प्रदूषित वायु का 22 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हिस्सा सांस के साथ शरीर में जाने पर यह एक सिगरेट पीने के बराबर होता है.’ उनके मुताबिक लोगों को एहतियात बरतनी चाहिए खासकर उन लोगों को जो अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सांस संबंधी अन्य रोगों से पीड़ित हैं.

उधर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी की हालत किसी गैस चेंबर जैसी हो गई है. उनका यह भी कहना है कि इसकी वजह हरियाणा और पंजाब हैं जो अपने किसानों को पराली जलाने पर मजबूर कर रहे हैं. उधर, कई अभिभावकों ने ट्विटर के माध्यम से दिल्ली सरकार से स्कूलों को बंद करने का अनुरोध किया है.