1-इराक से लेकर मिस्र तक मध्य-पूर्व में एक बार फिर उबाल है. इराक में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी गोलियों से मारे जा रहे हैं. लेबनान में प्रदर्शनकारियों ने देश को घुटनों पर ला दिया है और प्रधानमंत्री साद अल-हरीरी इस्तीफ़ा दे दिया है. मिस्र का भी कुछ ऐसा ही हाल है जहां सुरक्षाबलों ने राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल-सीसी के खिलाफ प्रदर्शन की कोशिशों को नाकाम किया है. इस भूचाल के कारणों को टटोलता बीबीसी पर जेरेमी बोवेन का लेख.

मध्य-पूर्व के इन मुस्लिम देशों में क्यों है उबाल

2- भारत में धर्मनिरपेक्षता की विचारधारा पिछले कुछ समय से निशाने पर है. द प्रिंट पर प्रकाशित अपने इस लेख में योगेंद्र यादव का मानना है कि इसके लिए कथित धर्मनिरपेक्ष लोग ही जिम्मेदार हैं जिनकी राजनीति ने धोखे की आड़ लेते हुए संविधान में दर्ज सेक्युलरिज्म के पवित्र सिद्धांत को अपने सुभीते का गणित बना छोड़ा है.

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3- जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म होने को तीन महीने होने के आए, लेकिन कश्मीर घाटी में अभी तक हालात सामान्य से काफी दूर दिखते हैं. इस बीच यूरोपीय सांसदों के यहां के दौरे पर भी विवाद हो गया है. इस पूरी कवायद से उठने वाले सवालों का विश्लेषण करती एनडीटीवी पर प्रियदर्शन की टिप्पणी.

कश्मीर की दीवार में कोई खिड़की नहीं रहती

4- कभी शिवसेना का भविष्य कहे जाने वाले राज ठाकरे फिलहाल राजनीति के हाशिये पर हैं. शिवसेना से अलग राह अपनाने के महज तीन साल बाद उनकी पार्टी ने 13 विधायकों के साथ महाराष्ट्र विधानसभा में मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई थी. लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी के 101 में से 100 उम्मीदवार खेत रहे. राज की राजनीति इतनी बुरी तरह क्यों दरकी, इस सवाल का जवाब टटोलती न्यूजलॉन्ड्री पर प्रतीक गोयल की रिपोर्ट.

राज ठाकरे : जवान होने से पहले ही ढल गई मनसे

5-जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल एक बड़े प्रतिनिधि मंडल के साथ भारत के तीन-दिवसीय दौरे पर आईं. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. भारत में उद्योग जगत और जानकारों के बीच इस यात्रा को लेकर मिली जुली भावनाएं हैं. इस यात्रा का विश्लेषण करती डॉयचे वेले पर चारु कार्तिकेय की रिपोर्ट

रिश्तों को कितना आगे बढाएगा मैर्केल का भारत दौरा