हृदयाघात, हार्ट फेल, स्ट्रोक और कई अन्य जानलेवा बीमारियों के लिए जिम्मेदार उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर भारत में तेजी से पैर पसार रहा है. पूरे देश के 18 वर्ष से अधिक उम्र के करीब दो लाख मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं. इंडिया साइंस वायर रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के साथ हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है, लेकिन इस शोध में कम उम्र के युवाओं में यह समस्या जिस तेजी से बढ़ती देखी गई है, उसने खतरे की घंटी बजा दी है.

इस अध्ययन में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 30 प्रतिशत से ज्यादा लोग हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त पाए गए हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि 18 और 19 वर्ष के युवाओं में सिर्फ 45 प्रतिशत युवा ही ऐसे थे जिनका रक्तचाप सामान्य पाया गया. 20 से 44 वर्ष के लोगों में हाई ब्लड प्रेशर के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए. यह निष्कर्ष भी निकला है कि पिछले सालों की तुलना में अब महिलाओं और पुरुषों दोनों में बढ़ती उम्र के साथ बल्डप्रेशर के मामले ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं.

इस शोध के लिए मरीजों के रक्तचाप संबंधी आंकड़े ‘कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया’ द्वारा वर्ष 2015 में देश के 24 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ लगाए गए रक्तचाप शिविरों से प्राप्त किए गए हैं.

इस शोध में शामिल रहे दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉ एस रामाकृष्णा इंडिया साइंस वायर से बातचीत में कहते हैं, ‘भारत में उच्च रक्तचाप की व्यापकता के बारे में लोगों की समझ अभी सीमित है. इसे हृदय रोगों के अलावा कई अन्य बीमारियों से जुड़ा प्रमुख कारण माना जाता है. हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी पैदा करने वाले कारकों का प्रबंधन समय रहते हो जाए तो स्वास्थ्य खतरों को काफी कम किया जा सकता है.’

पिछले दिनों हुए कुछ अन्य शोधों के नतीजे भी हाई ब्लड प्रेशर को लेकर चिंता बढ़ाते हैं. इनमें सामने आया था कि हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त विश्व के कुल मरीजों में से लगभग 17.6 प्रतिशत मरीज भारत से आते हैं. शोधकर्ताओं का कहना था कि इन आकड़ों को देखते हुए यहां निकट भविष्य में हृदय रोगों के बोझ में वृद्धि की आशंका है. एक अन्य शोध के मुताबिक विकसित देशों में 70 वर्ष से कम उम्र के लोगों की कुल मौतों में 23 प्रतिशत मौतों के लिए हृदय रोग को जिम्मेदार पाया गया है. भारत में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत है, जो विकसित देशों की तुलना में दोगुने से अधिक है.

बचाव के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य से जुड़ी इस उभरती चुनौती को देखते हुए शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्लड प्रेशर की जांच नियमित दैनिक देखभाल में शामिल होनी चाहिए. युवाओं को जागरूक करने की जरूरत है कि कम उम्र में भी वे हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हो सकते हैं. इससे बचाव के लिए नियमित व्यायाम और संतुलित वजन के साथ-साथ नमक का कम से कम उपयोग किया जाना जरूरी है.

शोधकर्ता

यह शोध दिल्ली स्थित एम्स, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हेल्थ इंस्टीट्यूट और केरल के त्रिस्सूर में स्थित मदर हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से किया है. शोधकर्ताओं में एम्स के एस रामाकृष्णन, कार्तिक गुप्ता, मदर हॉस्पिटल केरल के गीवर जैकेरिया और फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हेल्थ इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के अशोक सेठ शामिल थे. हाल ही में शोध पत्रिका ‘इंडियन हार्ट जर्नल’ में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है.