भारतीय कप्तान और स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने अपने 31वें जन्मदिन के मौके पर अतीत को एक खास तरीके से याद किया है. उन्होंने 15 साल के विराट कोहली को एक चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने अपने दिवंगत पिता को याद किया है. विराट कोहली ने इसके साथ ही पश्चिमी दिल्ली में रहने वाले 15 साल के उस बच्चे को उन ‘परांठों’ की याद सहेजने को कहा जो अगले कुछ वर्षों में उसकी पहुंच से दूर होने वाले हैं.

सोशल मीडिया पर साझा किए इस पत्र में विराट कोहली ने लिखा, ‘मुझे पता है कि तुम उन जूतों के बारे में सोच रहे जो पापा ने आज तुम्हें नहीं दिए. आज सुबह जब वे तुमसे गले मिले या तुम्हारी लंबाई को लेकर उन्होंने जो चुटकुला सुनाया उससे अगर तुलना करोगे तो इस बात की कोई अहमियत नहीं है.’ अपने पिता के बारे में भारतीय कप्तान ने कहा, ‘मुझे पता है कि कभी-कभी वे कठोर लग सकते हैं. लेकिन ऐसा इसलिए है कि वे तुमसे तुम्हारा सर्वश्रेष्ठ चाहते हैं.’ विराट कोहली ने लिखा, ‘पापा से कहो कि तुम उनसे प्यार करते हो. बहुत सारा. आज ही उनसे बोलो. कल भी कहो. उन्हें बार बार कहो.’

विराट कोहली के पिता प्रेम कोहली का 54 साल की उम्र में ब्रेन हैमरेज की वजह से निधन हो गया था. दुनिया का शीर्ष बल्लेबाज बन चुका उनका बेटा तब सिर्फ 18 साल का था. विराट कोहली ने अपने पिता के अंतिम संस्कार के एक दिन बाद मैदान पर उतरते हुए दिल्ली की ओर से रणजी ट्राफी में 90 के आसपास रन बनाए थे और अपनी टीम को हार से बचाया था.

अब बेहद सफल क्रिकेटर बन चुके कोहली एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नंबर एक जबकि टेस्ट क्रिकेट में दूसरी रैंकिंग वाले बल्लेबाज हैं. चिट्ठी में उन्होंने यह भी लिखा है कि उन्हें जीवन में कभी ना कभी विफलताओं का सामना करना होगा. विराट कोहली के शब्द हैं, ‘तुम विफल हो जाओगे. सभी होते हैं. खुद से वादा करो कि तुम कभी ऊपर उठना नहीं भूलोगे. और अगर पहले प्रयास में तुम ऐसा नहीं कर पाओ तो दोबारा प्रयास करो.’

विराट कोहली ने लिखा है, ‘मैं तुम्हें ये कहना चाहता हूं कि जीवन ने तुम्हारे लिए बड़ी चीजें रखी हैं विराट. लेकिन तुम्हें प्रत्येक मौके के लिए तैयार रहना होगा. मौका मिलने पर इसका फायदा उठाओ. और तुम्हारे पास जो भी है उससे कभी संतोष मत करना.’ उन्होंने आगे लिखा है, ‘कई लोग तुम्हें प्यार करेंगे और नापसंद भी करेंगे. इनमें कई ऐसे भी होंगे जो तुम्हें जानते भी नहीं. उनकी परवाह मत करो. स्वयं पर विश्वास रखो.’