भारत के इतिहास में पानीपत की तीसरी लड़ाई को 18वीं सदी का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है. मराठों और अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली के बीच लड़ा गया यह युद्ध न सिर्फ कई ऐतिहासिक उलटफेरों की वजह बताया जाता है बल्कि भारतीय योद्धाओं की शौर्यगाथा का प्रमाणित दस्तावेज भी माना जाता है. आशुतोष गोवारीकर निर्देशित ‘पानीपत’ 1761 में हुई इसी मशहूर पानीपत की लड़ाई पर आधारित है.

मराठों की तरफ से पानीपत के युद्ध का नेतृत्व बाजीराव पेशवा के भतीजे सदाशिव राव भाऊ ने किया था. हालांकि इतिहासकार लड़ाई के मनचाहे नतीजे ना मिलने का जिम्मेदार सदाशिव राव के अदूरदर्शी नेतृत्व को ही ठहराते हैं लेकिन ट्रेलर इशारा देता है कि फिल्म इन तथ्यों से दूरी बनाकर केवल उनके सकारात्मक पक्षों की बात करेगी. फिल्म में सदाशिव राव की यह भूमिका अर्जुन कपूर ने निभाई है. आमतौर पर अभिनय से हाथभर की दूरी बनाकर रखने वाले अर्जुन इन झलकियों में आपको थोड़ा चौंकाते हैं. हालांकि उनकी संवाद अदायगी यहां पर भी थोड़ा खटकती है लेकिन फिर भी उनसे इस बार ठीक-ठाक अभिनय की उम्मीद की जा सकती है, ऐसा ट्रेलर कहता है.

‘पानीपत’ की ये झलकियां यह भी बताती हैं कि ‘पद्मावत’ के खिलजी की तरह ही हमलावर अब्दाली के किरदार को भी पूरी तवज्जो के साथ रचा गया है. इसे निभा रहे संजय दत्त भी इन झलकियों में ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ वाले अंदाज में खौफ रचते दिखाई दे रहे हैं लेकिन वे रणवीर सिंह सरीखी दहशत रच पाएंगे या नहीं, कह पाना मुश्किल है. इनके अलावा, ट्रेलर में कृति सेनॉन भी ध्यान खींचती हैं जो सदाशिव राव की पत्नी पार्वतीबाई का किरदार निभा रही हैं.

साल 2016 में सिंधुघाटी सभ्यता पर बनी एक्शन-एडवेंचर फिल्म ‘मोहेनजो-दारो’ के तकरीबन तीन साल बाद आशुतोष गोवारीकर यह पीरियड ड्रामा लेकर आ रहे हैं. लंबे इंतज़ार के बाद आ रही उनकी इस फिल्म का ट्रेलर एक रोमांचक-ऐतिहासिक कथा दिखाने के बाद भी ज्यादा उत्सुकता नहीं जगा पाता है. लेकिन गोवारीकर का रिकॉर्ड रहा है कि जब भी उन्होंने लंबा समय लेकर फुर्सत से सिनेमा रचा है, कुछ बेहतरीन ही पेश किया है. अब ये देखने वाली बाद होगी कि छह दिसंबर को जब वे ‘पानीपत’ के जरिए एक ऐतिहासिक लड़ाई को सिनेमाई परदे पर पहुंचाएंगे तो कौन सा नया इतिहास रचेंगे.

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