करतारपुर कॉरीडोर की शुरुआत से पहले पाकिस्तान द्वारा इससे जुड़ा एक प्रमोशनल वीडियो विवादों के घेरे में आता दिख रहा है. इसकी वजह है इस वीडियो में दिख रहा एक पोस्टर जिसमें भिंडरावाले सहित तीन खालिस्तानी अलगाववादियों की तस्वीर के साथ रेफरेंडम 2020 लिखा हुआ है.

चार मिनट लंबा यह वीडियो पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने जारी किया है. वीडियो शुरू होने के कुछ देर बाद ही पाकिस्तान के एक गुरुद्वारे में जाते सिख तीर्थयात्री दिखते हैं जहां यह पोस्टर लगा हुआ है. इसमें भिंडरावाले के अलावा पूर्व मेजर जनरल शाहबेग सिंह और अमरीक सिंह खालसा दिखते हैं. ये तीनों ही 1984 में स्वर्णमंदिर में सेना की कार्रवाई में मारे गए थे.

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पहले ही आशंका जताई थी कि करतारपुर कॉरीडोर को पाकिस्तान पंजाब में सिख उग्रवाद को फिर से हवा देने के लिए इस्तेमाल कर सकता है. उन्होंने ही नहीं, सुरक्षा एजेंसियों ने भी यह संभावना जाहिर की थी. इस कॉरीडोर की शुरुआत नौ नवंबर को होनी है.

मान्यता है कि करतारपुर में सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानकदेव ने अपना अंतिम समय बिताया था. यह पाकिस्तानी पंजाब के नरोवाल जिले में है. रावी नदी के दूसरी ओर भारतीय पंजाब में स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे से इसकी दूरी करीब चार किलोमीटर है. पिछले साल नवंबर में भारत और पाकिस्तान, करतारपुर साहिब को डेरा बाबा नानक से जोड़ने के लिए एक गलियारे का निर्माण करने पर सहमत हुए थे.

पाकिस्तान ने करतारपुर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए 20 डॉलर यानी करीब 1400 रु का शुल्क रखा है. भारत ने उससे ऐसा न करने का अनुरोध किया था. लेकिन उसने इससे इनकार कर दिया. पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निमंत्रण दिया था. लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि वे आम तीर्थयात्री की तरह वहां जाएंगे. करतारपुर जाने वाले पहले जत्थे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी समेत 575 लोगों के नाम शामिल हैं.