महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में एक गठबंधन बनाकर लड़ने वाली भारतीय जनता पार्टी और उसकी सहयोगी शिवसेना के बीच प्रदेश में नई सरकार बनाने को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है. जबकि चुनाव परिणाम आए तकरीबन दो हफ्ते होने वाले हैं.

जिस दिन चुनावी नतीजे आए और भाजपा की सीटें 2014 के मुकाबले कम हो गईं, उसी दिन से शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा ठोंक रखा है. पार्टी बार-बार यह कह रही है कि खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बराबरी के फाॅर्मूले पर सहमति दी थी, इसलिए अब शिवसेना को न सिर्फ मंत्रालयों के मामले में बराबरी चाहिए बल्कि मुख्यमंत्री के पद पर भी वह बराबर का हिस्सा चाहती है.

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के मिलकर सरकार नहीं बना पाने की स्थिति में पिछले कुछ दिनों से शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस और कांग्रेस की मिली-जुली सरकार बनाने की बात कही जा रही है. लेकिन अब भाजपा के अंदर से भी एक और नए विकल्प की बात सामने आने लगी है. इसके तहत यह कहा जा रहा है कि शिवसेना को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को मुख्यमंत्री का पद देने के प्रस्ताव के साथ तैयार करने की कोशिश की जाए.

इस बारे में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं, ‘चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा की ओर से जिन लोगों ने शिवसेना से बात की है, उनमें अधिकांश लोगों को यह लगता है कि शिवसेना को मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से काफी समस्याएं हैं. बातचीत में शामिल लोगों को यह भी लगता है कि अगर फडणवीस के अलावा कोई और नाम भाजपा की ओर से आगे बढ़ाया जाए तो संभवतः शिवसेना मुख्यमंत्री पद से अपना दावा छोड़ सकती है.’

यह पूछे जाने पर कि देवेंद्र फडणवीस से शिवसेना को क्या दिक्कत है, वे कहते हैं, ‘मुझे लगता नहीं है कि फडणवीस से शिव सेना के शीर्ष नेतृत्व को कोई निजी खुन्नस होगी. लेकिन मुख्यमंत्री पद पर फडणवीस की दावेदारी को लेकर जिस तरह की बात खुद उनकी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की ओर से बार-बार की गई, संभव है कि शिवसेना उससे नाराज हो. शिवसेना की ओर से बार-बार ये कहा जा रहा था कि वह एक शिव सैनिक को मुख्यमंत्री के पद पर देखना चाहती है. उसके बड़े नेताओं को यह भी लग रहा है कि अगर वे फडणवीस को मुख्यमंत्री बनने से रोक लेते हैं तो इससे महाराष्ट्र में ये संदेश भी जाएगा कि उसने अपना पारंपरिक आक्रामक रुख अपना लिया है और भाजपा ने उसके दबाव में यह निर्णय लिया है. शिवसेना के नेताओं को यह लग रहा होगा कि ऐसा करने से पार्टी को आगे बढ़ाने में उन्हें मदद मिलेगी.’

अगर देवेंद्र फडणवीस नहीं तो फिर कौन बनेगा महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री? इस सवाल के जवाब में भाजपा के ये नेता कहते हैं, ‘केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी इस पद के लिए एक मजबूत दावेदार हैं. 2014 में भी उनके नाम को लेकर काफी चर्चा चली थी. ठाकरे परिवार के सभी सदस्य उनका काफी सम्मान करते हैं. ठाकरे परिवार से उनका संबंध बाल ठाकरे के दौर का ही है. इसलिए संभव है कि अगर भाजपा की ओर से नितिन गडकरी का नाम बढ़ाया जाए तो शिवसेना इसके लिए तैयार हो जाए.’

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच चल रही खींचतान के बीच नितिन गडकरी का नाम पहली बार मंगलवार को तब सामने आया जब शिवसेना के नेता किशोर तिवारी ने कहा कि अगर भाजपा गडकरी को बातचीत के लिए भेजेगी तो दो घंटे में इस समस्या का समाधान हो जाएगा. तिवारी ने इस बाबत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को बाकायदा एक पत्र भी लिखा है.

मुख्यमंत्री के तौर पर नितिन गडकरी की संभावनाओं के बारे में महाराष्ट्र भाजपा के एक नेता बताते हैं, ‘महाराष्ट्र में फडणवीस के उभार के बाद से यह संदेश गया है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जान-बूझकर गडकरी के पर कतरने में लगा है. कई लोग ऐसा मानते हैं कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस को आगे करके पार्टी नेतृत्व ने नितिन गडकरी को पीछे करने की योजना पर काम किया है. इससे महाराष्ट्र भाजपा के एक खेमे में थोड़ी नाराजगी है. इस खेमे को आप गडकरी समर्थक खेमा कह सकते हैं. ऐसे में अगर पार्टी की ओर से नितिन गडकरी का नाम आगे बढ़ाया जाता है तो इस पर न सिर्फ शिवसेना के तैयार होने की संभावना अधिक है बल्कि भाजपा के भी एक वर्ग को यह अच्छा ही लगेगा.’

हालांकि, जब नई दिल्ली में अमित शाह से मिलने देवेंद्र फडणवीस पहुंचे तो इस मुलाकात के बाद उन्होंने फिर से यही दोहराया कि महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री भी वे ही बनेंगे. लेकिन भाजपा के अलग-अलग नेताओं से बात करने पर पता चलता है कि अगर फडणवीस के नाम पर सहमति नहीं बनी और पार्टी को लगा कि गडकरी के अलावा किसी और के नाम पर शिवसेना अपना समर्थन नहीं देगी तो फिर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा.

नितिन गडकरी के नाम पर शिवसेना के तैयार हो जाने की अधिक संभावना इसलिए भी है क्योंकि एनसीपी और कांग्रेस उसके स्वाभाविक साझीदार नहीं हैं. इसलिए शिवसेना के लिए एनसीपी और कांग्रेस के साथ जाने के मुकाबले यह अधिक अनुकूल होगा कि नितिन गडकरी जैसे नेता के नेतृत्व में सरकार बने ताकि महाराष्ट्र सरकार से संबंधित अधिकांश बड़े निर्णय गडकरी खुद ले सकें. फडणवीस के बारे में कहा जाता है कि महत्वपूर्ण निर्णयों के मामले में वे अकस्र दिल्ली पर अधिक निर्भर रहते हैं. जबकि अगर गडकरी मुख्यमंत्री बनते हैं तो उन पर शीर्ष नेतृत्व या कोई और उस तरह से दबाव बनाने की स्थिति में नहीं रहेगा.

भाजपा को तकरीबन ढाई साल पहले गोवा में भी इन्हीं परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था. गोवा में 2017 के विधानसभा चुनावों के बाद जब भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था तब जो सहयोगी दल भाजपा के साथ आए, उनकी ओर से ही मनोहर पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाने की शर्त रखी गई थी. इसके बाद तब रक्षा मंत्री रहे पर्रिकर को भाजपा ने केंद्र से वापस गोवा भेज दिया था. उस समय इस मामले में नितिन गडकरी ने भी एक प्रमुख भूमिका निभाई थी.