परेशान पीएमसी बैंक खाताधारकों का एक समूह दिल्ली में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कार्यालय के बाहर जमा हुआ. इन सभी ने केंद्रीय बैंक से यह आश्वासन मांगा कि घोटाले से प्रभावित सहकारी बैंक में उनके खाते सुरक्षित हैं और निर्धारित समय के भीतर उन्हें उनकी रकम वापस मिल जायेगी.

मंगलवार को आरबीआई ने बैंक के उपभोक्ताओं के लिये पैसे निकालने की सीमा बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी. लेकिन यह परेशान खाताधारकों की चिंताएं दूर करने के लिये काफी नहीं है.

पीटीआई के मुताबिक आरबीआई मुख्यालय के बाहर जमा हुए 20 खाताधारकों में से अधिकतर पश्चिमी दिल्ली में तिलक नगर से थे, जहां बैंक की एक शाखा है. खाताधारक तरणजीत सिंह (33) ने कहा कि कम से कम आरबीआई को उन्हें आश्वस्त करना चाहिए कि उनकी जमा राशि निर्धारित समय में वापस मिल जायेगी. सिंह निजी नौकरी में हैं और घोटाला प्रभावित बैंक में उनके 10 लाख रुपये जमा हैं. उन्होंने यह भी कहा, ‘आरबीआई को एक संवाददाता सम्मेलन करना चाहिए और हमें आश्वस्त करना चाहिए कि हमारे पैसे सुरक्षित हैं.’

आरबीआई कार्यालय के बाहर जमा हुए पीएमसी बैंक खाताधारकों में 65 वर्षीय मंजीत सिंह भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि बैंक में उनकी लाखों की सावधि जमा राशि है और उनकी आजीविका इन्हीं जमा राशियों से मिलने वाले ब्याज पर निर्भर है.

पंजाब एवं महाराष्ट्र सहकारी बैंक (पीएमसी बैंक) 10 शहरी सहकारी बैंकों में शामिल है. नियमों से हटकर दिये गये कर्ज की जानकारी छुपाने के कारण 23 सितंबर से छह महीने के लिये यह बैंक आरबीआई की प्रशासनिक निगरानी में है.

यह संकट उस वक्त शुरू हुआ, जब इसमें 4,355 करोड़ रुपये का घोटाला प्रकाश में आया. इसके बाद आरबीआई ने 24 सितंबर से प्रति उपभोक्ता 1,000 रुपये निकालने की सीमा तय कर दी. हालांकि अब यह सीमा बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गयी है.