देश के प्रतिष्ठित मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने बुधवार को दावा किया कि उन्होंने मध्यस्थता समिति से कहा था कि बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि विवाद मामले में मुस्लिम पक्षकार राम चबूतरा, सीता रसोई और सहन (आंगन) के हिस्से पर अपना दावा छोड़ने को तैयार हैंं. उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि उन्हें तीन गुंबदों के नीचे और सामने की जगह दे दी जाए तो मस्जिद के बाकी के हिस्से पर हम अपना दावा छोड़ देंगे.

मौलाना अरशद मदनी ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा, ‘मध्यस्थता की कोशिश 11-12 बार नाकाम हो चुकी थी, लेकिन जब उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता के लिए कहा तो मैं मध्यस्थता के लिए सहमत हो गया.’ उन्होंने कहा, ‘मध्यस्थता का मतलब है कि सभी पक्षकार अपने-अपने रुख में थोड़ा नरमी लाएं. अगर कोई पीछे नहीं हटता है तो मध्यस्थता नहीं होगी.’ जमीयत प्रमुख ने कहा कि बाबरी मस्जिद में एक हिस्सा गुबंद के नीचे का है और एक उसका सहन है, जहां राम चबूतरा और सीता रसोई है. उन्होंने कहा, ‘हमारा झगड़ा इसे लेकर है. हम इसे अपना हिस्सा बताते हैं और हिंदू पक्षकार कहते हैं कि राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है.’ मौलाना मदनी ने कहा, ‘‘ हमने मध्यस्थों से कहा कि अगर हिंदू पक्षकार तीन गुंबदों और इसके सामने वाला हिस्सा छोड़ दे तो हम इस बात पर गौर कर सकते हैं कि सहन के दूसरे हिस्से (जिसमें राम चबूतरा और सीता रसोई) पर दावा छोड़े दें. हालांकि वह मस्जिद का हिस्सा है.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन रामलला और निर्मोही अखाड़ा एक इंच भी पीछे नहीं हटे और उनका एक ही मुद्दा था कि मुसलमान मस्जिद उन्हें दें दें. इसलिए मध्यस्थता कामयाब नहीं हुई.’ उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या विवाद को आपसी सहमति से हल करने के लिए तीन मध्यस्थों की एक समिति गठित की थी. लेकिन समिति कोई सहमति नहीं बना पाई थी. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई पूरी कर चुका है और माना जा रहा है कि कुछ ही दिनों में अयोध्या विवाद पर फैसला आ जाएगा.