दिल्ली उच्च न्यायालय में गुरुवार को एक याचिका दायर कर तीस हजारी अदालत परिसर में दो नवंबर की झड़प और सार्वजनिक प्रदर्शन करने और ‘धरना’ देने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया गया है. वकील राकेश कुमार लकड़ा ने यह याचिका दायर की है. याचिका में वकीलों और पुलिस के बीच हुई झड़प से संबंधित मामला अदालत के विचाराधीन होने के बावजूद सोशल मीडिया में बयान जारी करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है. इस जनहित याचिका को शुक्रवार को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध किया गया है.

इस याचिका में केंद्र सरकार के साथ ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली के पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक, अरुणाचल प्रदेश के पुलिस उपमहानिरीक्षक मधुर वर्मा, दिल्ली पुलिस के पूर्व उपायुक्त असलम खान, एनआईए की पुलिस अधीक्षक संयुक्ता पराशर और आईपीएस अधिकारी मेघना यादव को पक्षकार बनाया गया है. याचिका में ‘धरना’ पर बैठने वाले, ‘भड़काऊ नारे लगाने वाले’ और इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया पर उकसाने वाले बयान जारी करने वाले दिल्ली पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के संबंध में केंद्र को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. इसमें आरोप लगाया गया है कि पुलिस अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन किया जो उनकी आधिकारिक ड्यूटी का उल्लंघन है.

पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच तनाव पिछले शनिवार से बना हुआ है जब पार्किंग के विवाद को लेकर हुई झड़प में 20 सुरक्षाकर्मी और कई वकील घायल हो गये थे. इसके बाद हजारों पुलिसकर्मियों ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था और साकेत अदालत के बाहर उनके सहकर्मियों पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. ‘पुलिस की वर्दी में हमलोग इंसान हैं’, ‘हमलोग कोई पंचिंग बैग नहीं हैं’ और ‘सुरक्षा करने वालों को सुरक्षा चाहिए’ जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मी प्रदर्शन कर रहे थे और अपने वरिष्ठों से वर्दी का सम्मान बचाने के लिये उनके साथ खड़ा होने का अनुरोध कर रहे थे.

इस प्रकरण में कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर विचार जाहिर किए थे. दिल्ली पुलिस के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी मधुर वर्मा फिलहाल अरुणाचल प्रदेश के डीआईजी हैं. उन्होंने लिखा था , ‘माफी चाहता हूं... हमलोग पुलिस वाले हैं... हमारा कोई वजूद नहीं है... हमारा कोई परिवार नहीं है... हमारे लिये कोई मानवाधिकार नहीं है!’ दिल्ली के पूर्व डीसीपी असलम खान जो फिलहाल गोवा में तैनात हैं, उन्होंने भी मधुर वर्मा का साथ देते हुए हमले का एक वीडियो पोस्ट किया और साथ में लिखा, ‘खाकी की स्थिति बदतर होती जा रही है.’ आईपीएस एसोसिएशन ने भी हमले की निंदा की थी और ‘अपमान’ एवं ‘हमले’ का निशाना बने सहकर्मियों के प्रति एकजुटता दिखायी थी. दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों की इस तरह की बयानबाजी आपत्तिजनक और सेवा शर्तों का उल्लंघन है.