महाराष्ट्र में जारी सियासी अनिश्चितता को आज भी सभी अखबारों ने पहले पन्ने की खबर बनाया है. शिवसेना ने अपने सभी विधायकों को मुंबई के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है. इससे पहले पार्टी ने आरोप लगाया था कि भाजपा उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है. उधर, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उम्मीद जताई है कि राज्य में देवेंद्र फड़णवीस ही मुख्यमंत्री होंगे और सरकार शिवसेना के सहयोग से ही बनेगी. इसके अलावा करतारपुर कॉरीडोर पर पाकिस्तान का यूटर्न भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के उलट पाकिस्तान की सेना का बयान आया है कि करतारपुर साहिब आने वाले भारतीय श्रद्धालुओं को पासपोर्ट दिखाना होगा.

‘कंगाली’ से जूझती कांग्रेस ने आम चुनाव में 820 करोड़ रु खर्च किए

कांग्रेस ने 2019 के आम चुनाव और इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडीशा और सिक्किम में हुए विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए 820 करोड़ रुपये खर्च किए थे. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पार्टी ने चुनाव आयोग के दिए खर्च के ब्योरे में यह जानकारी दी है. यह आंकड़ा 2014 में पार्टी द्वारा आम चुनाव के दौरान खर्च किए गए 516 करोड़ रु से कहीं ज्यादा है. दिलचस्प बात यह है कि मई में कांग्रेस की तत्कालीन सोशल मीडिया प्रमुख दिव्या स्पदंना ने कहा था कि कांग्रेस आर्थिक तंगी से जूझ रही है. भाजपा ने अभी तक अपने चुनावी खर्च का ब्योरा नहीं सौंपा है.

गेस्ट हाउस कांड में मुलायम सिंह के खिलाफ केस वापस

लोकसभा चुनाव से पूर्व सपा और बसपा ने ढाई दशक की दुश्मनी को खत्म कर जिस तरह दोस्ती की थी, वह दोस्ती तो नहीं रही, लेकिन 1995 के गेस्ट हाउस कांड में मुलायम सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमा खत्म हो गया है. दैनिक जागरण के मुताबिक मायावती ने सुप्रीम कोर्ट से अपना मुकदमा औपचारिक रूप से वापस ले लिया है. यह दोनों पार्टियों में चुनावी गठबंधन के एक महीने के भीतर हुआ था. 26 फरवरी, 2019 को बसपा की ओर से पेश अधिवक्ता ने न्यायाधीश एनवी रमना, इंद्रा बनर्जी और हेमंत गुप्ता की पीठ से अपनी अपील वापस लेने की इजाजत मांगी थी. यह मामला करीब डेढ़ दशक तक चला था.

सोशल मीडिया पर डेढ़ सौ प्रोफाइलों को लेकर सैन्य अधिकारियों को सतर्क किया गया

भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर 150 प्रोफाइलों को लेकर अपने अधिकारियों को सतर्क किया है. जनसत्ता ने यह खबर दी है. अखबार के मुताबिक इस बारे में बीते महीने अधिकारियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई है. इसमें कहा गया है कि इन सोशल मीडिया प्रोफाइलों को हनीट्रैप की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है और इनके जरिये संवेदनशील सूचनाएं निकलवाई जा सकती हैं. पिछले कुछ समय में इस तरह के कई मामले हुए हैं जिनमें सैन्यकर्मी फंसे हैं.