चर्चित अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की रेटिंग ‘स्थिर’ से घटाकर ‘नकारात्मक’ कर दी है. उसका कहना है कि देश की आर्थिक प्रगति की रफ्तार अभी धीमी ही रहेगी. माना जा रहा है कि मूडीज के इस कदम का एक मतलब यह भी है कि आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए किए जा रहे मोदी सरकार के उपाय प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे जिसके चलते पहले ही भारी कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है.

इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून तिमाही के दौरान में भारत की अर्थव्यवस्था सिर्फ पांच फीसदी की दर से बढ़ी. यह 2013 के बाद इसका सबसे बुरा प्रदर्शन है. जानकारों के मुताबिक उपभोक्ता मांग घटने के साथ सरकार द्वारा किए जाने वाले खर्च में कमी और वैश्विक कारणों के चलते भी ऐसा हो रहा है. हाल में खबर आई थी कि अर्थव्यवस्था के आठ बुनियादी क्षेत्रों से जुड़े औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई है.

हालांकि अर्थव्यस्था के सुस्त चक्के को गति देने के लिए मोदी सरकार ने काफी कोशिशें की हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते दिनों कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का ऐलान किया था. इसके अलावा उन्हें कपड़ा निर्यात क्षेत्र के लिए एक नई नीति लाने की घोषणा भी की थी. सरकार लगातार यह भी कह रही है कि निवेशकों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा.