नोटबंदी की तीसरी वर्षगांठ पर आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि 2,000 रुपये के नोट को बंद कर देना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट की जगह लाए गए 2,000 रुपये के नोट की जमाखोरी की जा रही है और इसे बंद कर देना चाहिए.

सुभाष चंद्र गर्ग ने एक नोट में कहा , ‘वित्तीय प्रणाली में अब भी काफी मात्रा में नकदी है. 2,000 रुपये के नोटों की जमाखोरी इसका सबूत है.’ सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि मूल्य के आधार पर चलन में मौजूद मुद्रा में 2,000 रुपये के नोट की एक - तिहाई हिस्सेदारी है. उन्होंने दो हजार रुपये के नोट को बंद करने या चलन से वापस लेने की वकालत करते हुए कहा, ‘वास्तव में 2,000 रुपये के नोटों का एक अच्छा-खासा हिस्सा चलन में नहीं है. इनकी जमाखोरी हो रही है. इसलिए मुद्रा के लेनदेन में 2,000 रुपये के नोट ज्यादा नहीं दिखते हैं.’

सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा , ‘बिना किसी दिक्कत के इन नोटों को बंद किया जा सकता है. इसका एक आसान तरीका है कि इन नोटों को बैंक खातों में जमा कर दिया जाए. इसका उपयोग प्रक्रिया के प्रबंधन में किया जा सकता है.’ आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव ने कहा , ‘भुगतान करने के बेहद सुविधाजनक डिजिटल मोड तेजी से नकदी की जगह ले रहे हैं. हालांकि भारत को इस दिशा में अभी लंबी दूरी तय करना है क्योंकि देश में 85 प्रतिशत से अधिक लेनदेन में अभी भी नकदी की मौजूदगी है.’ सुभाष चंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में बेहद सशक्त अधिकारियों में गिने जातेे थे. लेकिन, दूसरे कार्यकाल में वित्त मंत्रालय से स्थानांतरण के बाद एससी गर्ग ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली थी. माना जाता है कि वे अपने स्थानांतरण के चलते नाराज थे, इसलिए उन्होंने वीरआरएस का फैसला लिया.