अयोध्या के राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले देश भर में सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विभिन्न धर्म गुरुओं ने लोगों से शांति बनाए रखने तथा न्यायालय के फैसले का सम्मान करने की अपील की है. दिल्ली में फैसला सुनाने वाली संविधान पीठ के पांचों न्यायाधीशों के आवास के बाहर शुक्रवार से सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. इस संवेदनशील मामले में फैसला साढ़े दस बजे सुनाया जाएगा.

इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने शुक्रवार सुबह उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी और पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह के साथ एक घंटे बैठक की. अधिकारियों ने उन्हें राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई सुरक्षा व्यवस्था के बारे में अवगत कराया.

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अयोध्या पर जो भी फैसला आएगा, वह किसी की हार-जीत नहीं होगा. प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार रात सिलसिलेवार ट्वीट किए. एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘देश की न्यायपालिका के मान-सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए समाज के सभी पक्षों ने, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने, सभी पक्षकारों ने बीते दिनों सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए जो प्रयास किए, वे स्वागत योग्य हैं. कोर्ट के निर्णय के बाद भी हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है.’

दूसरी तरफ, रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से पहले अयोध्या छावनी में तब्ब्दील हो गयी है. जमीन से आसमान तक पुलिस निगरानी की व्यवस्था की गयी है. शहर के हर चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं. आसमान से ड्रोन कैमरे चप्पे-चप्पे पर नजर रखे हुए हैं. अयोध्या की सुरक्षा के प्रभारी एडीजी (अभियोजन) आशुतोष पांडेय ने बताया, ‘अयोध्या में सुरक्षा के लिये पीएसी की 60 कंपनियां और अर्धसैनिक बल तैनात किए गये हैं. इसके अलावा दूसरे जनपदों से आये सुरक्षाकर्मियों में 1500 सिपाही, 250 सब इंस्पेक्टर, 150 इंस्पेक्टर, 20 डिप्टी एसपी, 11 एडिशनल एसपी तथा दो एसपी तैनात किये गये हैं.’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि आने वाले फैसले को जीत-हार के साथ जोड़कर न देखा जाए. उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 नवंबर तक प्रदेश के सभी स्कूल कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने की घोषणा की है.

दिल्ली सरकार ने भी एहतियाती कदम उठाते हुए आज को शहर के सारे निजी स्कूलों को बंद रखने की सलाह दी है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यह जानकारी दी. वहीं, अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बड़ा दी है और शहर के संवेदनशील इलाके में गश्त बढ़ा दी है. इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि शांति व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि में संलिप्त पाये जाने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी.

उधर, हिंदू और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने समाज के सभी वर्गों से इस फैसले का सम्मान करने और शांति बनाए रखने की अपील की है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, ‘जैसा कि हम शुरू से ही संविधान के दायरे में रहते आए हैं, अत: हम सभी को ऐसा कोई भी मुशायरा या प्रदर्शन नहीं करना चाहिए जिससे किसी के मजहबी जज्बात को ठेस पहुंचे.’

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि मुल्क के तमाम मुसलमान संविधान और न्यायपालिका में विश्वास रखते हैं. उनके मुताबिक यही वजह है कि मुस्लिम रहनुमा शुरू से ही कहते आए हैं कि अदालत का जो भी फैसला होगा उसे वह स्वीकार करेंगे. उन्होंने कहा कि फैसले वाले दिन और उसके बाद ना तो मुसलमान ‘अल्लाह हू अकबर’ के और ना ही हिंदू ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाएं ताकि माहौल शांतिपूर्ण बना रह सके.

लखनऊ के दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर के पुरोहित सर्वेश शुक्ला ने कहा कि वे समाज के सभी वर्गों से सिर्फ यह अपील करना चाहते हैं कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करें. उनका कहना था, ‘लोगों को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि वह ऐसा कोई काम ना करें जिससे दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे.’ लखनऊ के कैथोलिक डायोसियस के चांसलर फादर डोनाल्ड डिसूजा ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है इसलिए सभी को अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए.

विभिन्न राज्यों में भी लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की गई है. जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने पीटीआई को बताया कि केंद्र शासित क्षेत्र जम्मू कश्मीर में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा जारी की गई है. इसके तहत चार से अधिक लोग एक स्थान पर इकट्ठे नहीं हो सकते. इस केंद्र शासित प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों को शनिवार को बंद रखने के आदेश दिए गए हैं. नौ नवंबर को होने वाली सभी परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि न्यायालय के इस फैसले का हर किसी को सम्मान करना चाहिए. उन्होंने समाज के सभी तबकों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को राज्य में कानून व्यवस्था सुनिश्चित रखने का निर्देश दिया. मध्य प्रदेश सरकार ने शनिवार को राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों को बंद करने की घोषणा की है. प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सभी वर्ग के लोगों से अपील की है कि फैसला जो भी आये, सभी मिल जुलकर उसका सम्मान व आदर करें. उधर, कर्नाटक सरकार ने घोषणा की है कि अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट फैसले के मद्देनजर राज्य के सभी स्कूल और कॉलेज नौ नवंबर को बंद रहेंगे. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सभी नागरिकों से संयम रखने की अपील की.