ऐतिहासिक अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना रहा है. पांच जजों की संविधान पीठ यह फैसला सर्वसहमति से सुना रही है. उसने विवादित जमीन पर राम लला विराजमान पक्ष का दावा बरकरार रखा है. शीर्ष अदालत ने कहा कि यह जमीन राम जन्मभूमि न्यास को दी जाए. उसने कहा कि हिंदुओं की इस आस्था पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता कि राम उस जगह पर पैदा हुए थे. उसने राम मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट बनाने का आदेश भी दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए एक वैकल्पिक जगह दी जाए. इसके लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन अयोध्या में ही किसी भी खास जगह पर देने का आदेश दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन पर निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया है. उसने शिया वक्फ बोर्ड की याचिका भी खारिज कर दी है जिसका कहना था कि विवादित जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड की नहीं बल्कि उसकी है. शीर्ष अदालत ने भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट को सही माना है और कहा कि खुदाई में जो साक्ष्य मिले वे इस्लामिक ढांचे के नहीं थे. उसका यह भी कहना है कि आस्था निजी विषय है और मामले के फैसले का आधार आस्था नहीं बल्कि कानून है.

अयोध्या मामले में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने 40 दिनों तक सुनवाई की. छह अगस्त से रोज चली यह सुनवाई 16 अक्टूबर को खत्म हुई थी. सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह दूसरी सबसे लंबे समय तक चलने वाली सुनवाई रही. इस मामले में पहले नंबर पर मील का पत्थर कहा जाने वाला केशवानंद भारती मामला है जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने 68 दिनों तक की थी. वहीं तीसरा स्थान आधार कार्ड की संवैधानिकता से जुड़े मामले का है. सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई 38 दिनों तक चली थी.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले मध्यस्थता के जरिये भी अयोध्या विवाद सुलझाने की कोशिश की थी. इसके लिए उसने रिटायर्ड जस्टिस एफएमआई कलीफ़ुल्लाह की अगुवाई में उसने तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल बनाया था. लेकिन यह पहल नाकाम रही.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में फैसला सुनाया था कि अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाए. हाई कोर्ट ने इसे राम लला, सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा के बीच बराबर-बराबर बांटने का फ़ैसला सुनाया था. लेकिन तीनों ही पक्षकारों ने इस फैसले को मानने से इनकार करते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.