अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. इस फैसले के जरिये शीर्ष अदालत ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है. आइए जानते हैं फैसले की पांच बड़ी बातें:

1- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ जमीन पर राम लला विराजमान का दावा है. यानी उसने बाकी दो पक्षों निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड की दलीलें खारिज कर दी हैं. शीर्ष अदालत ने कहा है कि इस फैसले का आधार आस्था नहीं बल्कि कानून है और उसने तमाम सबूतों पर गौर करने के बाद यह फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने यह फैसला एकमत से सुनाया है.

2- शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है कि जमीन पर राम मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट का निर्माण किया जाए. इसके लिए उसे तीन महीने का वक्त दिया गया है. अदालत ने कहा कि विवादित जमीन इस ट्रस्ट को ट्रांसफर की जाए. इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा हो या नहीं, यह फैसला केंद्र पर छोड़ दिया गया है.

3- सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए एक वैकल्पिक जगह दी जाए. इसके लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि मस्जिद बनाने के लिए यह जमीन अयोध्या में ही किसी मुख्य जगह पर दी जाए. सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना था कि एक पक्ष की आस्था को दूसरे की आस्था के ऊपर तरजीह नहीं दी जा सकती.

4- सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड इस जगह के इस्तेमाल का सबूत नहीं दे पाया. उसने कहा कि मस्जिद के अंदर के चबूतरे पर कब्जे को लेकर गंभीर विवाद रहा और बाहरी चबूतरे पर मुसलमानों का कब्जा कभी नहीं रहा. ऐतिहासिक यात्रा वृतांतों का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सदियों से मान्यता रही है कि अयोध्या ही राम का जन्मस्थान है. उसके मुताबिक हिंदुओं की इस आस्था को लेकर कोई विवाद नहीं है. सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना था कि एएसआई को संबंधित जगह पर खुदाई के दौरान जो साक्ष्य मिले वे किसी इस्लामिक ढांचे के नहीं थे.

5- अयोध्या मामले में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने 40 दिनों तक सुनवाई की. छह अगस्त से रोज चली यह सुनवाई 16 अक्टूबर को खत्म हुई थी. सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह दूसरी सबसे लंबे समय तक चलने वाली सुनवाई रही. इस मामले में पहले नंबर पर मील का पत्थर कहा जाने वाला केशवानंद भारती मामला है जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने 68 दिनों तक की थी. वहीं तीसरा स्थान आधार कार्ड की संवैधानिकता से जुड़े मामले का है. सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई 38 दिनों तक चली थी.