अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने अपने साथ नाइंसाफी बताया है. पीटीआई के मुताबिक उत्तर प्रदेश सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा, ‘फैसले के कुछ बिंदुओं खासकर जमीन देने की बात से हम असंतुष्ट हैं. हम विचार करेंगे कि पुनर्विचार याचिका दायर करनी है या नहीं.’ मस्जिद के लिए पांच एकड़ की वैकल्पिक जमीन देने को लेकर उन्होंने कहा कि मस्जिद की कोई कीमत नहीं हो सकती. हालांकि जफरयाब जिलानी का यह भी कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ पहलू देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने में सुधार लाने में मदद कर सकते हैं.

अयोध्या विवाद पर अपने फैसले के जरिये शीर्ष अदालत ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ जमीन पर राम लला विराजमान का दावा है. यानी उसने बाकी दो पक्षों निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड की दलीलें खारिज कर दी हैं. शीर्ष अदालत ने कहा है कि इस फैसले का आधार आस्था नहीं बल्कि कानून है और उसने तमाम सबूतों पर गौर करने के बाद यह फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने यह फैसला एकमत से सुनाया है.

शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है कि जमीन पर राम मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट का निर्माण किया जाए. इसके लिए उसे तीन महीने का वक्त दिया गया है. अदालत ने कहा कि विवादित जमीन इस ट्रस्ट को ट्रांसफर की जाए. इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा हो या नहीं, यह फैसला केंद्र पर छोड़ दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए एक वैकल्पिक जगह दी जाए. इसके लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि मस्जिद बनाने के लिए यह जमीन अयोध्या में ही किसी मुख्य जगह पर दी जाए.