आज करतारपुर कॉरीडोर की शुरुआत हो रही है. भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अपने-अपने यहां इस कॉरीडोर का उद्घाटन करेंगे. इसके साथ ही लाखों सिखों का बिना वीजा के इस पवित्र स्थल का दर्शन करने का सपना पूरा हो जाएगा. मान्यता है कि करतारपुर में सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानकदेव ने अपना अंतिम समय बिताया था. यह पाकिस्तानी पंजाब के नरोवाल जिले में है. रावी नदी के दूसरी ओर भारतीय पंजाब में स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे से इसकी दूरी करीब चार किलोमीटर है. इसी दूरी को एक गलियारे यानी कॉरीडोर के जरिये पाटा जा रहा है. इसके जरिये रोज 5000 श्रद्धालु करतारपुर स्थित दरबार साहिब के दर्शन कर सकेंगे.

पिछले साल नवंबर में भारत और पाकिस्तान, करतारपुर साहिब को डेरा बाबा नानक से जोड़ने के लिए इस कॉरीडोर का निर्माण करने पर सहमत हुए थे. इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ. हालांकि इसकी शुरुआत होते-होते कई विवाद भी इससे आ जु़ड़े. भारत ने पाकिस्तान से अनुरोध किया था कि वह भारतीय श्रद्धालुओं पर कोई शुल्क न लगाए. लेकिन पाकिस्तान ने हर श्रद्धालु से 20 डॉलर यानी करीब 1400 रु वसूलने का फैसला किया है. इसके अलावा इस कॉरीडोर से संबंधित पाकिस्तान सरकार के एक वीडियो पर भी विवाद हुआ. इसमें जरनैल सिंह भिंडरावाले सहित तीन खालिस्तानी अलगाववादियों का एक पोस्टर दिख रहा था. भारत सरकार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई.

ताजा विवाद कल ही हुआ जब खबर आई कि करतारपुर गुरुद्वारे के परिसर में एक बम डिस्प्ले किया गया है. इसके बारे में दावा किया गया है कि यह 1971 के युद्ध में भारतीय वायु सेना ने गुरुद्वारे पर गिराया था. भारतीय सुरक्षा एजेंसियां चिंता जता चुकी हैं कि पाकिस्तान करतारपुर कॉरीडोर को सिख अलगाववादी भावनाएं भड़काने के लिए इस्तेमाल कर सकता है.