राज्यपाल से शिवसेना को सरकार गठन का न्योता मिलने के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है. शिवसेना नेता संजय राउत ने संकेत दिए हैं कि अगली सरकार उनकी पार्टी, एनसीपी और कांग्रेस के मेल से बन सकती है. पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा कि तीनों पार्टियों को मतभेद भूलकर महाराष्ट्र के हित में एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम के साथ आना चाहिए. एनडीए में अपनी सहयोगी भाजपा के बारे में उनका कहना था कि अगर पार्टी अपना वादा पूरा नहीं करना चाहती तो ऐसे गठबंधन में रहने का कोई मतलब नहीं.

शिवसेना का दावा है कि भाजपा के साथ उसकी 50:50 के फॉर्मूले पर सहमति हुई थी जिसके तहत मुख्यमंत्री पद ढाई साल के लिए उसे मिलना है. हालांकि भाजपा ऐसी किसी सहमति से इनकार कर चुकी है. संजय राउत ने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़कर अपनी विरोधी रहीं एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने का बचाव भी किया है. उनका कहना था, ‘अगर भाजपा जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ हाथ मिला सकती है तो शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ क्यों नहीं.’ इससे पहले एक ट्वीट में उनका कहना था, ‘अगर रास्ते की परवाह करूंगा तो मंजिल बुरा मान जाएगी.’

महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय सदन में भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना के पास राज्य में सरकार बनाने के लिए सोमवार को शाम साढ़े सात बजे तक का समय है. राज्य में 21 अक्टूबर को हुए चुनाव में भाजपा ने 105 सीटों जबकि शिवसेना ने 56 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके अलावा एनसीपी ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की. अगर शिवसेना विपक्षी दलों के समर्थन से सरकार बनाने का फैसला करती है तो सदन में तीनों पार्टियों के विधायकों की कुल संख्या 154 होगी जो बहुमत के 145 के आंकड़े से अधिक है.