महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कोशिश में लगी शिवसेना को बड़ा झटका लगा है. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उसे और समय देने से इनकार कर दिया है. कल राज्यपाल से मुलाकात के बाद शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने मीडिया को यह जानकारी दी. अब न्योता एनसीपी को मिला है. यह खबर आज के लगभग ज्यादातर अखबारों के पहले पन्ने पर है. इसके अलावा दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में बढ़ी हॉस्टल और मेस फीस के खिलाफ छात्रों के विशाल विरोध प्रदर्शन को भी कई अखबारों ने प्रमुखता से जगह दी है.

प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति की तस्वीर के गलत इस्तेमाल पर अब जेल हो सकती है

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की तस्वीर के दुरुपयोग पर अब छह महीने तक की कैद और पांच लाख रुपए का जुर्माना लग सकता है. पहले इस पर सिर्फ 500 रु के जुर्माने का प्रावधान था. अमर उजाला के मुताबिक केंद्र सरकार ने 1950 के प्रतीक एवं नाम (अनुचित प्रयोग रोकथाम) कानून में इस तरह के प्रावधान लाने जा रही है. बताया जा रहा है कि उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सात दशक पुराने इस में बदलाव का मसौदा तैयार कर लिया है और कानून मंत्रालय ने इस पर मंजूरी भी दे दी है. अब सार्वजनिक राय लेने के बाद मसौदे को केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. सरकार की कोशिश है कि इस विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में ही पारित करा लिया जाए.

सतर्कता आयोग को 100 भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी नहीं मिली

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) करीब 100 भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए चार महीने से भी ज्यादा समय से मंजूरी का इंतजार कर रहा है. दैनिक जागरण के मुताबिक इन भ्रष्ट अफसरों में आइएएस अधिकारियों के साथ-साथ सीबीआई और ईडी से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं. नियमों के मुताबिक भ्रष्टाचार के आरोपित सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति चार महीने के भीतर प्रदान कर दी जानी चाहिए. सीवीसी के आंकड़ों के मुताबिक भ्रष्टाचार के इन 51 मामलों में 97 अधिकारी शामिल हैं. सबसे ज्यादा आठ-आठ अधिकारी कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (भ्रष्टाचार निरोधी मामलों में नोडल अथॉरिटी) और कॉरपोरेशन बैंक के हैं. भ्रष्टाचार के छह मामलों की मंजूरी उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष लंबित है.

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में प्याज कारोबारियों के ठिकानों पर आयकर के छापे

महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के प्याज कारोबारियों के व्यावसायिक ठिकानों पर सोमवार को आयकर अधिकारियों ने छापे मारे. ये छापे सब्जियों की आसमान छूती कीमतों के पीछे अवैध तकरीके से जमाखोरी की रिपोर्ट मिलने के बाद मारे गए हैं. दैनिक भास्कर के मुताबिक आयकर अधिकारियों ने व्यापारियों के बही-खातों की जांच की और स्टॉक भी देखा. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कारोबारियों ने भारी मात्रा में नकद भुगतान कर प्याज की खरीदी की. कच्चे कागजों में चार करोड़ से अधिक का ट्रांजेक्शन मिला है, जिसका उपयोग प्याज का स्टॉक कर दाम बढ़ाने और मुनाफा कमाने के लिए किया गया.