सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद अर्थव्यवस्था में सुस्ती बनी हुई है. इसका अंदाजा औद्योगिक उत्पादन के ताजा आंकड़ों से लगता है. सितंबर में औद्योगिक उत्पादन में 4.3 प्रतिशत की कमी आई. यह बीते आठ साल में इसमें सबसे बड़ी गिरावट है.

सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि औद्योगिक उत्पादन में एक साल पहले यानी सितंबर 2018 में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी. अगस्त 2019 में इसमें 1.4 प्रतिशत की गिरावट आयी थी. यानी यह लगातार दूसरा महीना है जब औद्योगिक उत्पादन नीचे आया. यह इसमें अक्टूबर 2011 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है. तब इसमें पांच प्रतिशत की गिरावट आयी थी.

औद्योगिक उत्पादन में गिरावट का मुख्य कारण विनिर्माण क्षेत्र की कमजोरी मानी जा रही है. सितंबर महीने में इस क्षेत्र में 3.9 प्रतिशत की गिरावट आयी जबकि एक साल पहले इसी महीने इसमें 4.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. सितंबर 2019 में बिजली उत्पादन भी 2.6 प्रतिशत घटा जबकि एक साल पहले इसी महीने इसमें 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. बाकी ज्यादातर क्षेत्रों का हाल भी कुछ ऐसा ही है.

जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) आंकड़ा 29 नवंबर को आना है. जानकार मानते हैं कि भविष्य के लिहाज से तस्वीर चिंताजनक दिख रही है. पीटीआई के मुताबिक इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा, ‘आईआईपी में काफी उतार-चढ़ाव रहा है और कुछ महीनों में जो तेजी दिखी थी, वह गायब हो गयी.’ उन्होंने आगे बताया, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल वृद्धि के मामले में संरचनात्मक नरमी से गुजर रही है. इसका कारण घरेलू बचत दर और कृषि क्षेत्र में वृद्धि में गिरावट है.’