राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की सिफारिश और इस पर केंद्र की अनुशंसा के बाद महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है. यह खबर आज सभी अखबारों के पहले पन्ने पर है. राज्यपाल ने पहले भाजपा, फिर शिवसेना और आखिर में एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था. लेकिन कोई 145 यानी बहुमत के आंकड़े को पार करने का सबूत नहीं दे सका. इसके अलावा स्वर कोकिला लता मंगेशकर की हालत नाजुक बनी हुई है. सोमवार रात सांस लेने में तकलीफ होने के चलते उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इस खबर को भी अखबारों ने प्रमुखता से जगह दी है.

भाजपा को कॉरपोरेट्स से मिले चुनावी चंदे का 75 फीसदी टाटा के ट्रस्ट से मिला
कॉरपोरेट कंपनियों ने पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2018-19 में भाजपा को 472 करोड़ रु का चुनावी चंदा दिया. इसमें से 356 करोड़ रु यानी करीब 75 फीसदी उसे टाटा समूह के प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिला. कांग्रेस को चार चुनावी ट्रस्टों से करीब 99 करोड़ रु की रकम मिली. इसमें से 55.6 करोड़ रु यानी लगभग 56 फीसदी हिस्सा टाटा के ट्रस्ट से आया था. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इन पार्टियों ने निर्वाचन आयोग को सौंपी वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है. भाजपा को मिले चंदे में पिछले साल के मुकाबले करीब तिगुनी बढ़ोतरी हुई है. दिलचस्प बात यह है कि 2018-19 में टाटा के ट्रस्ट ने तृणमूल कांग्रेस को भी 43 करोड़ रु दिए हैं जबकि इससे पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा शून्य था.
चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के बेटे की कंपनी के खिलाफ ईडी का मामला
चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के बेटे अबीर और उनसे जुड़ी कंपनी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के कथित उल्लंघन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर हैं. दैनिक जागरण के मुताबिक अबीर और उनसे जुड़ी कंपनी ‘नॉरिश ऑर्गनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा इस साल की शुरुआत में हासिल की गई 7.25 करोड़ रुपये की राशि की जांच के लिए ईडी ने फेमा के तहत मामला दर्ज किया है. इस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि मॉरिशस से इस रकम को हासिल करने में फेमा का उल्लंघन तो नहीं किया गया था. अशोक लवासा को केंद्रीय वित्त सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद 23 जनवरी, 2018 को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था. हाल में हुए आम चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू करने के संबंध में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र के साथ उनके मतभेद खुलकर सामने आए थे.
आरसीईपी को लेकर अरविंद पनगढ़िया की सलाह
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने भारत को क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक समझौते (आरसीईपी) में शामिल होने की सलाह दी है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अगर सरकार इसके उलट जाती है तो कोई भी बहुराष्ट्रीय कंपनी यहां नहीं आना चाहेगी. हालांकि उनका यह भी कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी आरसीईपी में शामिल न होने की बात इसलिए कही है कि वे भारत के लिए कुछ और छूट हासिल करना चाहते हैं. चर्चित अरविंद पनगढ़िया ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष के पद से 2017 में इस्तीफा दिया था. उन्हें जनवरी 2015 में नीति आयोग का पहला उपाध्यक्ष बनाया गया था.
फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर हमसे जुड़ें | सत्याग्रह एप डाउनलोड करें
Respond to this article with a post
Share your perspective on this article with a post on ScrollStack, and send it to your followers.