राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही वायु गुणवत्ता ‘आपात’ श्रेणी के नजदीक जाती दिख रही है. पिछले 15 दिन में दूसरी बार शहर में प्रदूषण का इतना प्रकोप देखने को मिल रहा है. स्कूलों के खुले होने की वजह से छात्रों के इसकी चपेट में आने की आशंका भी बढ़ गई है. स्कूली छात्रों की मास्क पहने और रुमाल से मुंह ढकने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर हर जगह फैली हैं. कई लोगों ने शहर में खुले में कूड़ा जलाने और गंदगी के ढेरों की तस्वीरें भी साझा की हैं.

ट्विटर पर एक यूजर ने लिखा, ‘ऐसा विकासशील देश होने का क्या फायदा है जब हमारे बच्चे स्वच्छ हवा में सांस भी नहीं ले सकते.’ कई लोगों ने ऑड-ईवन यानी सम-विषम योजना के प्रभाव पर भी सवाल उठाए. एक अन्य यूजर का ट्वीट था, ‘ऐसे वातावरण में कौन जी सकता है जहां एक्यूआई, पीएम 2.5 .. 500 से पार है. मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दोनों से पूछना चाहूंगा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है और सम-विषम योजना भी कारगर होती नहीं दिख रही.’ उधर, अरविंद केजरीवाल का कहना है कि यह योजना आगे भी जारी रह सकती है.

दिल्ली में आज सुबह साढ़े 11 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 454 रहा. एक्यूआई 0-50 के बीच ‘अच्छा’, 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101-200 के बीच ‘मध्यम’, 201-300 के बीच ‘खराब’, 301-400 के बीच ‘अत्यंत खराब’, 401-500 के बीच ‘गंभीर’ और 500 के पार ‘बेहद गंभीर’ माना जाता है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की बात करें तो नोएडा में एक्यूआई 388 दर्ज किया गया, जबकि गाजियाबाद में 378, फरीदाबाद में 363 और गुड़गांव में यह 361 दर्ज किया गया.

इससे पहले एक्यूआई के लगातार गंभीर स्तर में रहने की वजह से दिल्ली में जन स्वास्थ्य के लिहाज से आपातकाल घोषित कर दिया गया था. दिल्ली सरकार ने पांच नवंबर तक स्कूलों को बंद करने और निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था.