सुप्रीम कोर्ट ने रफाल मामले में सरकार को क्लीन चिट देने के उसके फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग कर रही याचिकाओं को खारिज कर दिया है. शीर्ष अदालत के मुताबिक उसे नहीं लगता कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने या बेवजह जांच का आदेश देने की जरूरत है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला सुनाया.

फ्रांस के साथ रफाल विमान सौदे को लेकर ​दिसंबर 2018 में दिए अपने ही फैसले के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मई में सुनवाई पूरी करके फैसला सुरक्षित रख लिया था. अभियोजन पक्ष के वकील प्रशांत भूषण ने इस सौदे में सरकार पर तथ्यों को छुपाने के आरोप लगाए थे. उन्होंने यह भी कहा था कि इस सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) समानांतर बातचीत में संलिप्त था और ऐसे में इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाकर आपराधिक जांच कराई जानी चाहिए.

वहीं सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने तर्क दिया था कि रफाल लड़ाकू विमान किसी तरह के ‘श्रृंगार का सामान’ नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय है. उनका कहना था कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को गुमराह करने के इरादे से उसके सामने चोरी किए गए दस्तावेज रखे हैं और ऐसे में इनसे पूछा जाना चाहिए कि ये कागजात उन्हें कहां से मिले. अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल होने की वजह से दुनिया की कोई अदालत याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए तर्कों के आधार पर रक्षा सौदे की जांच नहीं कराएगी.

बीते साल विपक्षी दलों ने रफाल सौदे में सरकार पर भ्रष्टाचार करने संबंधी आरोप लगाए थे. उसके बाद मामला शीर्ष अदालत पहुंचा था. तब दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने 14 दिसंबर 2018 को फैसला सुनाते हुए इस सौदे में सरकार को क्लीन चिट दे दी थी. इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी.

मई में ही सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर भी सुनवाई पूरी करते हुए उस मामले में भी फैसला सुरक्षित रख लिया था. शीर्ष अदालत के एक फैसले का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि रफाल मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है. उनके उस बयान को भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने कोर्ट की अवमानना बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद कोर्ट ने उनसे इस पर स्पष्टीकरण मांगा था. इस दौरान राहुल गांधी ने अपने उस बयान को लेकर माफी भी मांगी थी. आज इस अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी को भविष्य में सावधान रहना चाहिए.