रफाल मामले में मोदी सरकार को क्लीन चिट देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दाखिल पुनर्विचार याचिकाएं खारिज होने के बाद भाजपा ने विपक्षी कांग्रेस पर हमला बोला है. पार्टी नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अब देश से माफी मांगनी चाहिए. आज इसी मामले से जुड़ी एक अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को चेतावनी देकर छोड़ दिया है. इस याचिका के मुताबिक राहुल गांधी ने यह गलत बात कहकर भ्रम फैलाया था कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि चौकीदार चोर है. रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘ऐसे लोग जिनके हाथ देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ से रंगे हैं वे अपने प्रायोजित राजनीतिक कार्यक्रम को न्याय की गुहार की तरह प्रस्तुत कर रहे थे.’

भाजपा के दूसरे नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने ट्वीट किया, ‘उच्चतम न्यायालय ने राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी. शीर्ष अदालत ने कहा कि राहुल गांधी को पूरा आदेश पढ़े बिना कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए तथा उन्हें भविष्य में सावधान रहना चाहिए.’ उनका आगे कहना था, ‘सड़क से लेकर संसद तक राहुल गांधी और उनकी पार्टी ने देश को गुमराह करने का प्रयास किया लेकिन सत्य की जीत हुई. मैं आशा करता हूं कि राहुल गांधी देश में होंगे और राष्ट्र से क्षमा मांगेंगे.’

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी राहुल गांधी पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है. अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘न्यायालय के फैसले ने एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं सरकार के दृढ़ संकल्प की पुष्टि की है. उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी और उसके पूर्व अध्यक्ष झूठ फैलाना बंद करेंगे एवं राष्ट्र निर्माण और देश की सुरक्षा के प्रति सकारात्मक योगदान देंगे.’

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने रफाल मामले में सरकार को क्लीन चिट देने के उसके फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग कर रही याचिकाओं को खारिज कर दिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि उसे नहीं लगता कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने या बेवजह जांच का आदेश देने की जरूरत है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला सुनाया.

फ्रांस के साथ रफाल विमान सौदे को लेकर ​दिसंबर 2018 में दिए अपने ही फैसले के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मई में सुनवाई पूरी करके फैसला सुरक्षित रख लिया था. अभियोजन पक्ष के वकील प्रशांत भूषण ने इस सौदे में सरकार पर तथ्यों को छुपाने के आरोप लगाए थे. उन्होंने यह भी कहा था कि इस सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) समानांतर बातचीत में संलिप्त था और ऐसे में इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाकर आपराधिक जांच कराई जानी चाहिए.

वहीं सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने तर्क दिया था कि रफाल लड़ाकू विमान किसी तरह के ‘श्रृंगार का सामान’ नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय है. उनका कहना था कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को गुमराह करने के इरादे से उसके सामने चोरी किए गए दस्तावेज रखे हैं और ऐसे में इनसे पूछा जाना चाहिए कि ये कागजात उन्हें कहां से मिले. अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल होने की वजह से दुनिया की कोई अदालत याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए तर्कों के आधार पर रक्षा सौदे की जांच नहीं कराएगी.

बीते साल विपक्षी दलों ने रफाल सौदे में सरकार पर भ्रष्टाचार करने संबंधी आरोप लगाए थे. उसके बाद मामला शीर्ष अदालत पहुंचा था. तब दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने 14 दिसंबर 2018 को फैसला सुनाते हुए इस सौदे में सरकार को क्लीन चिट दे दी थी. इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी.

मई में ही सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर भी सुनवाई पूरी करते हुए उस मामले में भी फैसला सुरक्षित रख लिया था. शीर्ष अदालत के एक फैसले का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि रफाल मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है. उनके उस बयान को भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने कोर्ट की अवमानना बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद कोर्ट ने उनसे इस पर स्पष्टीकरण मांगा था. इस दौरान राहुल गांधी ने अपने उस बयान को लेकर माफी भी मांगी थी. आज इस अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी को भविष्य में सावधान रहना चाहिए.