केरल स्थित सबरीमला के अयप्पा मंदिर के मामले में राज्य की एलडीएफ सरकार ने यू टर्न ले लिया है. उसका कहना है कि अगर किसी महिला को पुलिस सुरक्षा चाहिए तो उसे कोर्ट का ऑर्डर दिखाना होगा. यानी जिस तरह महिलाओं को पिछले साल सुरक्षा मुहैया कराई गई थी वैसा इस साल नहीं होगा. बताया जा रहा है कि केरल सरकार ने यह फैसला पोलित ब्यूरो की सलाह पर लिया है. आज सबरीमला मंदिर के कपाट खुलेंगे.

इससे पहले बीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में दायर पुनर्विचार याचिका को बड़ी बेंच को सौंप दिया था. हालांकि महिलाओं का मंदिर जाना अब भी जारी रखा गया है. बीते साल सितंबर में शीर्ष अदालत ने 10 से 50 साल की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक हटा दी थी. अदालत ने सदियों पुरानी इस परंपरा को असंवैधानिक बताया था. इसके बाद राज्य में हिंदूवादी समूहों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे. सबरीमला आने वाली कई महिलाओं पर हमला भी हुआ था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई थीं. हालांकि इस सबके बावजूद मुख्यमंत्री पी विजयन ने कहा था कि सरकार सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करवाने के संवैधानिक कर्तव्य से बंधी है. उनका यह भी कहना था कि इस फैसले को पलटने के लिए कानून लाने का उनका कोई इरादा नहीं है.