शिवसेना ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की आड़ में भाजपा की विधायकों की खरीद-फरोख्त की मंशाल है. अपने मुखपत्र ‘सामना’ में पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान को लेकर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन छह महीने से अधिक नहीं चलेगा. शिवसेना ने कहा कि नए राजनीतिक समीकरण ‘कई लोगों को पेट दर्द दे’ रहे हैं.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने शुक्रवार को कहा था कि भाजपा सबसे बड़ा दल है और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से उसकी संख्या 119 तक पहुंचती है. उनका कहना था कि इसके साथ भाजपा सरकार बनाएगी. शिवसेना ने सामना में कहा, ‘जिनके पास 105 सीटें हैं, उन्होंने पहले राज्यपाल से कहा था कि उनके पास बहुमत नहीं है. अब वे सरकार गठन का दावा कैसे कर रहे हैं?’

पार्टी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के राजनीति और क्रिकेट संबंधी बयान का जिक्र भी किया. सामना में कहा गया है, ‘गडकरी का संबंध क्रिकेट से नहीं है. उनका संबंध सीमेंट, इथेनॉल, एस्फाल्ट और अन्य चीजों से है.’ शिवसेना ने कहा कि क्रिकेट अब खेल कम और कारोबार ज्यादा हो गया है जिसमें खऱीद-फरोख्त और फिक्सिंग होती है. शुक्रवार को नितिन गडकरी ने कहा था, ‘क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी हो सकता है. कभी आपको लगता है कि आप मैच हार रहे हैं लेकिन परिणाम एकदम विपरीत होता है.’

भाजपा और शिवसेना ने गठबंधन में रहते हुए 21 अक्टूबर का विधानसभा चुनाव लड़ा था. 288 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 105 सीटें और शिवसेना ने 56 सीटें जीती थीं, जो सरकार बनाने के लिये बहुमत के आंकड़े को छू रही थीं. कांग्रेस और एनसीपी ने क्रमश: 44 और 54 सीटें जीती थीं. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मंगलवार को केंद्र को एक रिपोर्ट भेजकर मौजूदा स्थिति को देखते हुए राज्य में स्थिर सरकार के गठन को असंभव बताया था. इसके बाद से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है.