उपराष्ट्रपति एम वेंकैयानायडू ने शनिवार को कहा कि राजनीतिक दल और कारोबारी समूह अपना अखबार शुरू कर अपने निहित हितों को बढ़ावा दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा करके वे पत्रकारिता के मूल्यों के साथ समझौता कर रहे हैं. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने यह बात राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही.

उपराष्ट्रपति एम वेंकैयानायडू ने कहा कि कारोबारी समूह और राजनीतिक दल अपने हितों को बढ़ावा देने के लिए अपने अखबार और टेलीविजन चैनल भी शुरू कर रहे हैं. इससे पत्रकारिता के मूल्यों से समझौता हो रहा है. उन्होंने कहा, ‘राजनीतिक दल और नेता अपने अखबार शुरू कर रहे हैं. वे अखबार कहते हैं लेकिन उन्हें ‘न्यूजलेटर’ कहना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘यह एक अवांछनीय प्रवृत्ति है जो हमारी व्यवस्था में व्याप्त है. अपने व्यावसायिक हित की रक्षा और बढ़ावा देने के लिए, अपने प्रतिद्वंद्वियों को नकारात्मक तरीके से दिखाने के लिए, आप इसका (मीडिया) इस्तेमाल कर रहे हैं.’ उन्होंने पत्रकारों से खबरों को सनसनीखेज बनाते समय सावधानी बरतने का भी अनुरोध किया.

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि आज ‘पेड न्यूज’ की तुलना में ‘फेक न्यूज’ बड़ा संकट बन गया है. उन्होंने कहा, ‘प्रेस के लिए यह दिन अपनी आजादी के साथ जिम्मेदारी को भी समझने का है. आज पेड न्यूज से ज्यादा फेक न्यूज का संकट है.’ ‘फेक न्यूज’ की समस्या को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि समय आ सकता है जब मीडिया संस्थानों को पत्रकारों के लिए आचार संहिता बनाने की जरूरत पड़ सकती है.