मस्जिद के लिए दी गई जमीन ली जाए या नहीं, इस पर 26 नवंबर को फैसला लेंगे : सुन्नी वक्फ बोर्ड | रविवार, 10 नवंबर 2019

सुन्नी वक्फ बोर्ड उत्तर प्रदेश उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर अयोध्या में 5 एकड़ जमीन लेने के मामले पर 26 नवंबर को प्रस्तावित अपनी बैठक में फैसला करेगा. रविवार को बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारूकी ने पीटीआई से बातचीत में यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बोर्ड की सामान्य बैठक आगामी 26 नवंबर को संभावित है. उसमें ही यह निर्णय लिया जाएगा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार अयोध्या में सरकार द्वारा दी जाने वाली पांच एकड़ जमीन ली जाए या नहीं. इस बैठक में बोर्ड यह भी तय करेगा कि जमीन कैसे ली जाएगी और उसकी क्या शर्ते होंगी.

चुनाव आयोग को काटने वाले दांत देने वाले टीएन शेषन नहीं रहे | सोमवार, 11 नवंबर 2019

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का रविवार को चेन्नई में निधन हो गया. वे 86 वर्ष के थे. शेषन को चुनाव सुधारों की दिशा में उनके असाधारण योगदान के लिए जाना जाता है. पीटीआई के मुताबिक पूर्व चुनाव आयुक्त का स्वास्थ्य पिछले कुछ वर्षों से ठीक नहीं था और दिल का दौरा पड़ने से रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे उनका निधन हो गया.

अपनी स्पष्टवादिता के लिए मशहूर टीएन शेषन बढ़ती उम्र के कारण पिछले कुछ वर्षों से सिर्फ अपने आवास पर ही रहा करते थे. उनकी मृत्यु के बाद पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने एक ट्वीट के जरिये कहा है कि शेषन ‘अपने क्षेत्र के महारथी और अपने उत्तराधिकारियों के लिए प्रेरक थे. मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं.’

औद्योगिक उत्पादन में बीते आठ सालों की सबसे बड़ी गिरावट | मंगलवार, 12 नवंबर 2019

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद अर्थव्यवस्था में सुस्ती बनी हुई है. इसका अंदाजा औद्योगिक उत्पादन के ताजा आंकड़ों से लगता है. सितंबर में औद्योगिक उत्पादन में 4.3 प्रतिशत की कमी आई. यह बीते आठ साल में इसमें सबसे बड़ी गिरावट है.

सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि औद्योगिक उत्पादन में एक साल पहले यानी सितंबर 2018 में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी. अगस्त 2019 में इसमें 1.4 प्रतिशत की गिरावट आयी थी. यानी यह लगातार दूसरा महीना है जब औद्योगिक उत्पादन नीचे आया. यह इसमें अक्टूबर 2011 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है. तब इसमें पांच प्रतिशत की गिरावट आयी थी.

छात्र आंदोलन बढ़ता देख जेएनयू ने छात्रावास शुल्क में वृद्धि आंशिक रूप से वापस ली | बुधवार, 13 नवंबर 2019

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने 16 दिनों से चले आ रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद छात्रावास शुल्क में वृद्धि आंशिक रूप से वापस लेने का फैसला किया. इससे पहले, बुधवार को विश्वविद्यालय के छात्रों ने छात्रावास शुल्क में वृद्धि वापस लेने की अपनी मांग को लेकर विरोध- प्रदर्शन तेज कर दिया था.

जेएनयू की कार्यकारिणी परिषद् की बैठक में बुधवार को यह फैसला किया गया. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव आर सुब्रमण्यम ने ट्वीट किया, ‘जेएनयू कार्यकारिणी परिषद् छात्रावास शुल्क और अन्य नियमों को बहुत हद तक वापस लेने का फैसला करता है. आर्थिक रूप से कमजोर तबके (ईब्ल्यूएस) के छात्रों के लिये आर्थिक सहायता की एक योजना का भी प्रस्ताव किया गया है. अब कक्षाओं में लौटने का वक्त आ गया है.’

अनिश्चितता वाले बयान पर सरकार की नाराजगी के बाद वोडाफोन का यू टर्न, मीडिया पर ठीकरा फोड़ा | गुरूवार, 14 नवंबर 2018

भारत में अपने कारोबार को लेकर अनिश्चितता संबंधी बयान देने पर सरकार की नाराजगी के बाद दूरसंचार कंपनी वोडाफोन यूटर्न लेती दिखी. पीटीआई ने खबर दी कि वोडाफोन ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निक रीड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. इसमें वादा किया गया कि वोडाफोन भारत में निवेश करती रहेगी. उन्होंने मीडिया पर उनके बयान को तोड़मरोड़ करके पेश करने का भी आरोप लगाया. इससे पहले दूरसंचार मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा था कि सरकार ने भारत में दूरसंचार क्षेत्र के बारे में दिये गये वोडाफोन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के बयान पर नाखुशी प्रकट की है और वह इस बयान से असहमत है.

राहुल द्रविड़ को बड़ी राहत, हितों के टकराव का मामला खारिज | शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

भारत के महान खिलाड़ी राहुल द्रविड़ के लिये राहत भरी खबर आई. बीसीसीआई के आचरण अधिकारी (लोकपाल) डीके जैन ने उनके खिलाफ हितों के टकराव की शिकायत खारिज कर दी. उनका कहना था कि इसमें कोई दम नहीं है.

गुरूवार को जैन ने यह आदेश जारी करने के बाद पीटीआई से कहा, ‘मैंने शिकायत खारिज कर दी है. राहुल द्रविड़ के साथ हितों के टकराव का कोई मुद्दा नहीं है.’ जैन ने अपने आदेश में कहा है, ‘तथ्यों के आधार पर मुझे भरोसा हो गया है कि नियमों के अनुसार हितों के टकराव का मामला नहीं बनता है. नतीजतन, शिकायत खारिज कर दी जाती है जिसमें कोई दम नहीं है.’

सबरीमला : महिलाओं के प्रवेश पर केरल सरकार का यू-टर्न | शनिवार, 16 नवंबर 2019

केरल स्थित सबरीमला के अयप्पा मंदिर के मामले में राज्य की एलडीएफ सरकार ने यू टर्न ले लिया. उसका कहना है कि अगर किसी महिला को पुलिस सुरक्षा चाहिए तो उसे कोर्ट का ऑर्डर दिखाना होगा. यानी जिस तरह महिलाओं को पिछले साल सुरक्षा मुहैया कराई गई थी वैसा इस साल नहीं होगा. बताया जा रहा है कि केरल सरकार ने यह फैसला पोलित ब्यूरो की सलाह पर लिया है. आज सबरीमला मंदिर के कपाट खुलेंगे.

इससे पहले बीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में दायर पुनर्विचार याचिका को बड़ी बेंच को सौंप दिया था. हालांकि महिलाओं का मंदिर जाना अब भी जारी रखा गया है. बीते साल सितंबर में शीर्ष अदालत ने 10 से 50 साल की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक हटा दी थी. अदालत ने सदियों पुरानी इस परंपरा को असंवैधानिक बताया था. इसके बाद राज्य में हिंदूवादी समूहों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे. सबरीमला आने वाली कई महिलाओं पर हमला भी हुआ था.

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