1-महाराष्ट्र में तीन हफ्ते पहले विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से जारी सियासी अनिश्चितता छंटती दिख रही है. शरद पवार ने ऐलान कर दिया है कि शिव सेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस मिलकर साझा सरकार बनाएंगी. बीबीसी पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन का यह लेख बताता है कि शिव सेना और कांग्रेस का साथ अजूबा नहीं है जैसा कि कई मान रहे हैं.

कांग्रेस और शिव सेना का याराना भी कम पुराना नहीं: नज़रिया

2-नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल दो ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने बीते कुछ समय में भारत के राजनीतिक परिदृश्य पर व्यापक असर छोड़ा है. द प्रिंट हिंदी पर अपने इस लेख में टीएन नायनन का मानना है कि ये दोनों नेता भले ही विरोधी ध्रुवों पर हों, लेकिन उनमें कई समानताएं हैं.

केजरीवाल और मोदी में कई समानताएं हैं फर्क सिर्फ सांप्रदायिकता का है

3-फीस बढ़ाए जाने को लेकर दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इन दिनों उबाल है. छात्र प्रशासन से भिड़े हुए हैं. पूरे मुद्दे को लेकर कुछ उनके समर्थन में हैं तो कुछ विरोध में भी. द वायर हिंदी पर मुकेश कुलरिया का यह लेख बताता है कि वह कौन सी बात है जो जेएनयू को विशिष्ट बनाती है.

जेएनयू बराबरी के समाज की सबसे ख़ूबसूरत संभावना है…

4-भारत रंग महोत्सव यानी भारंगम को कई देश में रंगमंच से जुड़े आयोजनों का सबसे चमकदार नाम मानते हैं. भारंगम 2020 में होने वाले नाटकों की सूची आ गई है और आते ही इस पर विवाद भी हो गया है. न्यूजलॉन्ड्री हिंदी पर इस मुद्दे की पड़ताल करता अमितेश कुमार का लेख.

भारंगम 2020 में चयनित नाटकों पर क्यों हो रहा विवाद

5-जर्मनी की राजधानी बर्लिन के पास इलेक्ट्रिक कार प्लांट लगाने की घोषणा कर टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने कार उद्योग में हलचल मचा दी है. डॉयचे वेले पर महेश झा का यह लेख बताता है कि कैसे इस फैसले से जर्मनी के कार उद्योग को फायदा पहुंचने की उम्मीद है.

जर्मनी में टेस्ला का प्लाांट लगाने पर क्यों मची है हलचल