1- जस्टिस शरद अरविंद बोबडे देश के नए मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. वे देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश हैं. जस्टिस एसए बोबडे 23 अप्रैल 2021 को रिटायर होंगे. यानी मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल करीब 17 महीने का होगा.

2-जस्टिस एसए बोबडे ने कई ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई है. हाल ही में अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ करने के फैसले में वे शामिल रहे. अगस्त 2017 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता में नौ न्यायाधीशों की जिस पीठ ने निजता के अधिकार के संवैधानिक रूप से संरक्षित मूल अधिकार होने का फैसला दिया था उसमें भी वे शामिल थे.

3-जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता में ही सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को यौन उत्पीड़न के एक आरोप में क्लीन चिट दी थी. यह आरोप सुप्रीम कोर्ट की ही एक कर्मचारी ने लगाया था. वे 2015 में उस तीन सदस्यीय पीठ में भी शामिल थे जिसने स्पष्ट किया कि भारत के किसी भी नागरिक को आधार संख्या के अभाव में मूल सेवाओं और सरकारी सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता.

4-जस्टिस एसए बोबडे का जन्म 24 अप्रैल 1956 में महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ. उनके पिता अरविंद श्रीनिवास बोबडे मशहूर वकील थे. उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से कला और कानून में स्नातक की उपाधि ली. 1978 में महाराष्ट्र बार परिषद में उन्होंने बतौर अधिवक्ता अपना पंजीकरण कराया. करीब दो दशक तक वकालत करने के बाद उन्होंने 29 मार्च 2000 में बंबई हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. 16 अक्टूबर 2012 को जस्टिस एसए बोबडे मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने. 12 अप्रैल 2013 को उनकी पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में हुई.

5-माना जा रहा है कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति या उनके नाम को खारिज करने संबंधी कोलेजियम के फैसलों का खुलासा करने के मामले में जस्टिस एसए बोबडे पारंपरिक दृष्टिकोण अपनाएंगे. पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि लोगों की प्रतिष्ठा को केवल नागरिकों की जानने की इच्छा पूरी करने के लिए बलिदान नहीं किया जा सकता. जस्टिस एसए बोबडे ने यह भी कहा कि वे न्यायाधीशों के खाली पड़े पदों और न्यायिक आधारभूत संरचना की कमी को लेकर अपने पूर्ववर्ती सीजेआई गोगोई की ओर से शुरू किए गए कार्यों को तार्किक मुकाम पर पहुंचाना चाहते हैं.