आज संसद के शीतकालीन सत्र का पहला दिन है. यह 13 दिसंबर तक चलेगा. इससे पहले रविवार को बुलायी गई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आश्वासन दिया कि सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद का सबसे महत्वपूर्ण काम चर्चा और बहस करना है. नरेंद्र मोदी का यह भी कहना था कि संसद में रचनात्मक चर्चा नौकरशाही को भी सतर्क रखती है.

पीटीआई के मुताबिक बैठक में 27 दलों के सदस्यों ने भाग लिया. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने बताया कि सरकार द्वारा बुलाई गई बैठक में विपक्ष ने यह भी मांग की कि सत्र के दौरान आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और कृषि संकट के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए. विपक्ष ने लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला की हिरासत के मुद्दे को भी पुरजोर तरीके से उठाया और मांग की कि उन्हें सदन में भाग लेने की अनुमति दी जाए. हालांकि सरकार की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद हसनैन मसूदी ने कहा कि फारुक अब्दुल्ला की संसद के सत्र में भागीदारी सुनिश्चित करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है. उधर, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘किसी सांसद को अवैध रूप से हिरासत में कैसे लिया जा सकता है? उन्हें संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए.’

उधर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी राजनीतिक दलों से सदन के सुचारू संचालन के लिए सहयोग की अपील की. बैठक के बाद उन्होंने कहा कि सदन में विभिन्न दलों के नेताओं ने अलग अलग मुद्दों का उल्लेख किया जिनपर वे 18 नवंबर से 13 दिसंबर तक चलने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान सार्थक चर्चा करना चाहते हैं.