कल संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया. राज्यसभा का यह ऐतिहासिक 250वां सत्र है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि राज्यसभा दूसरा सदन जरूर है, लेकिन यह दोयम दर्जे का नहीं है. प्रधानमंत्री का यह भी कहना था कि राज्यसभा की सरकार पर नियंत्रण में केंद्रीय भूमिका होती है. इस खबर को आज कई अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. इसके अलावा फीस बढ़ोतरी के लेकर जेएनयू के छात्रों का संसद मार्च भी ज्यादातर अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. इस दौरान छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने उन पर बल प्रयोग भी किया.

नागरिकता संशोधन विधेयक में कुछ बदलाव हो सकते हैं

नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध को देखते हुए सरकार इसमें कुछ बदलाव कर सकती है. दैनिक जागरण के मुताबिक इस विधेयक में कुछ नए प्रावधान जोड़े जा सकते हैं. नए विधेयक में स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि कौन अवैध घुसपैठिए हैं और कौन धार्मिक उत्पीड़न के चलते पड़ोसी देशों से भागकर आए शरणार्थी. नागरिकता संशोधन विधेयक, 2018 में पिछली लोकसभा में पास हुआ था, लेकिन राज्यसभा में यह अटक गया था. पिछली लोकसभा का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही यह विधेयक भी खत्म हो गया था. अब सरकार फिर इसे संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी में है. इसके जरिये नागरिकता विधेयक, 1955 में संशोधन किया जाना है, ताकि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के चलते भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को बिना पर्याप्त दस्तावेज के भी भारतीय नागरिकता मिल सके.

वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल की सेवाएं एक दिसंबर से महंगी होंगी

वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल एक दिसंबर से मोबाइल टैरिफ में बढ़ोतरी करेंगी. दैनिक भास्कर के मुताबिक वोडाफोन-आइडिया ने कहा है कि यह उपभोक्ताओं को विश्वस्तरीय डिजिटल अनुभव देने के लिए जरूरी है. वहीं एयरटेल ने कहा कि ग्राहकों को किफायती टैरिफ उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है, लेकिन वित्तीय जरूरतों के साथ संतुलन भी जरूरी है, ताकि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी रखा जा सके. कंपनी का कहना है कि तभी उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की सेवा मिल सकेगी. वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल को बीती तिमाही में कुल 70 हजार करोड़ रु से ज्यादा का घाटा हुआ था.

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की 28 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी

केंद्र सरकार इसी वित्त वर्ष के दौरान एयर इंडिया, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) समेत सार्वजनिक क्षेत्र की 28 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी. हिंदुस्तान के मुताबिक वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. सरकार लंबे समय से अपने विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान उसने इससे 17,364 करोड़ रुपये जुटा भी लिए हैं. उसे उम्मीद है कि एयर इंडिया और बीपीसीएल में उसकी हिस्सेदारी बिकने से करीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटाने का उसका लक्ष्य पूरा हो जाएगा.