गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की कवायद पूरे देश में होगी. कल राज्यसभा में उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म के लोगों को इससे डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये सिर्फ एक प्रक्रिया है जिसका मकसद सभी नागरिकों की एक सूची बनाना है. यह खबर आज ज्यादातर अखबारों के पहले पन्ने पर है. इसके अलावा पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा है. इसके लिए उसे 25 नवंबर तक का वक्त दिया गया है. पी चिदंबरम फिलहाल आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्डरिंग मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में हैं. इस खबर को भी कई अखबारों ने प्रमुखता से जगह दी है.

आरबीआई ने डीएचएफएल का प्रशासन अपने हाथ में लिया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्तीय संकट में फंसी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के निदेशक मंडल को भंग कर दिया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने इसकी जगह पर कंपनी का कामकाज चलाने के लिये बुधवार को एक प्रशासक नियुक्त किया है. यह प्रशासक हैं इंडियन ओवरसीज बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक आर सुब्रमण्यकुमार. सरकार की ओर से आरबीआई को संकटग्रस्त एनबीएफसी और एचएफसी को दिवाला अदालत भेजने में सक्षम बनाने के बाद यह घोषणा की गई है. यानी यह मामला अब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में जाएगा. यह पहली बार है जब कोई फायनैंस कंपनी एनसीएलटी पहुंचेगी.

पांच कंपनियों के साथ सरकारी उपक्रमों में विनिवेश का सबसे बड़ा अभियान शुरू

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में रणनीतिक विनिवेश शुरू करने का फैसला किया है. दैनिक जागरण के मुताबिक पहले चरण में पांच कंपनियों - भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (बीपीसीएल), शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआइ), कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर्प), टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) और नार्थ ईस्टर्न इलेक्टिक पावर कॉरपोरेशन (नीपको) की बिक्री की जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बैठक में बुधवार को यह फैसला लिया. माना जा रहा है कि इस फैसले से सरकार के खजाने में बड़ी वृद्धि होगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘सरकार का फैसला है कि कई उपक्रमों में वह अपनी हिस्सेदारी 51 फीसद से कम करेगी, लेकिन कंपनियों पर सरकार का नियंत्रण बना रहेगा. ये किस तरह के उपक्रम या कंपनी होंगे, इसके बारे में बाद में फैसला किया जाएगा.’

निजी कॉलेजों को एमबीबीएस की आधी सीटों की फीस 70 फीसदी तक घटानी पड़ सकती है

देश भर के निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले छात्रों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिल सकती है. सरकार निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की आधी सीटों की फीस 70 फीसदी जबकि पोस्ट ग्रेजुएशन की फीस 90 फीसदी तक घटाने की तैयारी कर रही है. दैनिक भास्कर के मुताबिक नए नियमों से संबंधित ड्राफ्ट स्वास्थ्य मंत्रालय ने तैयार करा लिया है. दिसंबर के आखिरी हफ्ते या जनवरी 2020 में ड्राफ्ट को सार्वजनिक किया जाएगा. देश में मेडिकल एजुकेशन का जिम्मा अभी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) के जिम्मे है. इसी बोर्ड को सरकार ने एमबीबीएस और पीजी सीट की फीस तय करने के लिए ड्राफ्ट बनाने का जिम्मा दिया है. बीओजी के सूत्रों के अनुसार निजी कॉलेजों की 50 फीसदी एमबीबीएस सीटों की सालाना फीस 6 लाख से 10 लाख रु. तक होगी. देश में एमबीबीएस की 80 हजार सीटें हैं, जिनमें से 40 हजार निजी कॉलेजों में हैं.