रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के कर्जदाताओं ने चेयरमैन अनिल अंबानी और चार अन्य निदेशकों का कंपनी से इस्तीफा नामंजूर कर दिया है. आरकॉम के कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने साफ तौर पर कहा है कि पहले अनिल अंबानी और चारों निदेशक दिवाला प्रक्रिया में सहयोग करें, उसके बाद ही उनके इस्तीफे स्वीकारे जा सकते हैं. आरकॉम ने रविवार को शेयर बाजारों को यह जानकारी दी है.

पीटीआई के मुताबिक रविवार को आरकॉम ने शेयर बाजारों को बताया कि कंपनी के पदाधिकारियों के इस्तीफों पर विचार करने के लिए सीओसी की 20 नवंबर को एक बैठक हुई थी. इसमें समिति के सभी सदस्यों ने एकमत से यह निर्णय लिया कि ये इस्तीफे अभी स्वीकार नहीं किये जा सकते हैं.

कंपनी ने अपनी सूचना में आगे कहा है, ‘आरकॉम के संबंधित निदेशकों को बताया दिया गया है कि उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं किये गये हैं और उन्हें कंपनी के निदेशक के नाते अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहने का सुझाव दिया गया है. सीओसी की ओर से इन सभी को दिवाला एवं ऋणशोधन प्रक्रिया में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है.’

इस महीने की शुरुआत में अनिल अंबानी ने कर्ज के बोझ से दबी आरकॉम के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था. कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया था कि अनिल अंबानी के साथ ही छाया विरानी, रायना करानी, मंजरी काकर, सुरेश रंगाचर ने आरकॉम के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद इन इस्तीफों को कंपनी की सीओसी के समक्ष रखा गया था.

स्वीडन की दूरसंचार उपकरण कंपनी एरिक्सन के आवेदन के बाद आरकॉम फिलहाल दिवाला प्रक्रिया में है. राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने कंपनी का नियंत्रण दिवाला समाधान पेशेवर को सौंप दिया है. सूत्रों का अनुमान है कि आरकॉम समूह का कुल संरक्षित कर्ज करीब 33,000 करोड़ रुपये है. ऋणदाताओं ने आरकॉम से 49,000 करोड़ रुपये का दावा किया है.

आरकॉम ने अपनी संपत्तियों को बिक्री के लिए रखा है. इसमें 122 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम भी है जिसका मूल्य दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से पहले करीब 14,000 करोड़ रुपये था. इसी तरह कंपनी के टावर कारोबार का मूल्य करीब 7,000 करोड़ रुपये, आप्टिकल फाइबर नेटवर्क का 3,000 करोड़ और डेटा केंद्रों का मूल्य करीब 4,000 करोड़ रुपये है. आरकॉम की संपत्तियों की बिक्री का काम देख रही ऋणदाताओं की समिति इनके लिए जल्द बोलियां खोलेगी.