महाराष्ट्र का लगातार बदलता घटनाक्रम आज भी सभी अखबारों के पहले पन्ने पर है. राज्य में भाजपा सरकार गठन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा. शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस इसे असंवैधानिक बताते हुए शीर्ष अदालत पहुंची हैं. इससे पहले कल इन तीनों पार्टियों के 162 विधायक एक साथ जुटे. साथ ही, इन पार्टियों ने राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा भी पेश किया. इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकारों को फटकार लगाई है. शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे गैस चैंबर में नागरिकों को जीने के लिए मजबूर करने से बेहतर है उन्हें एक बार में भी बम से उड़ा दिया जाए. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है.

ममता बनर्जी सरकार शरणार्थियों को जमीन का मालिकाना हक देगी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि राज्य में सभी शरणार्थी बस्तियों को नियमित (वैध) किया जाएगा. यानी शरणार्थी के तौर पर रह रहे लोगों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा. दैनिक जागरण के मुताबिक ममता बनर्जी ने कहा, ‘1971 से अधर में लटके इन लोगों के पास न जमीन है और न ही घर इसलिए यह उनका हक है.’ उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार की जमीन पर बसी 94 शरणार्थी बस्तियों को नियमित किया जा चुका है. उधर, भाजपा ने इसे अवैध प्रवासियों को बचाने की कोशिश बताया है. पार्टी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार वोटबैंक के लिए ऐसा कर रही है.

सुभाष चंद्रा का जी एंटरटेनमेंट से इस्तीफा

जी एंटरटेनमेंट के चेयरमैन पद से सुभाष चंद्रा ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया. दैनिक भास्कर के मुताबिक बोर्ड ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया है. 27 साल पहले 1992 में जी एंटरटेनमेंट की शुरुआत करने वाले सुभाष चंद्रा अब कंपनी में गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर रहेंगे. इसके बाद कंपनी चलाने वाले बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है. जी एंटरटेनमेंट का कहना है कि इस कवायद का मकसद अलग-अलग क्षेत्र के अनुभवी लोगों को शामिल कर कंपनी को मजबूत बनाना है ताकि मौजूदा और नए निवेशक जिन्होंने 4,770 करोड़ रुपए का निवेश कर कंपनी के आंतरिक मूल्यों के प्रति भरोसा जताया, उन्हें अच्छा संदेश दिया जा सके. जी कंपनी का स्वामित्व रखने वाला एस्सेल ग्रुप इस साल की शुरुआत से नकदी संकट से जूझ रहा है. कर्ज चुकाने के लिए समूह ने प्रमोटर शेयरों समेत कई संपत्तियां बेची हैं.

ज्यादातर भारतीय आधार से संतुष्ट

ज्यादातर भारतीय आधार से खुश हैं. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एक सर्वे में यह बात सामने आई है. इसके मुताबिक अधिकांश लोगों को लगता है कि आधार से कल्याणकारी योजनाओं के उचित लाभार्थियों तक पहुंचने के मोर्चे पर सुधार आया है. असम और मेघालय को छोड़ दें तो अब 95 फीसदी वयस्कों और 75 फीसदी बच्चों का आधार बन चुका है. इनमें से 97 फीसदी का कहना है कि आधार से हालात सुधरे हैं. इनके मुताबिक यह राशन, मनरेगा और सामाजिक पेंशन जैसी सुविधाओं के मामले में पारदर्शिता लेकर आया है.