पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है. पीटीआई के मुताबिक उसने सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के कार्यकाल को तीन वर्ष के लिए और बढ़ाने संबंधी अधिसूचना पर रोक लगा दी है. यह फैसला उनकी 29 नवंबर को होने जा रही सेवानिवृत्ति से ठीक पहले आया है. पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा ने सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने के बाद सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी.

प्रधानमंत्री इमरान खान ने जनरल कमर जावेद बाजवा के कार्यकाल को और तीन साल बढ़ाने के लिए 19 अगस्त को मंजूरी दी थी. अधिसूचना में कहा गया था, ‘जनरल कमर जावेद बाजवा को उनके मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद से और तीन साल के लिए सेना प्रमुख नियुक्त किया जाता है.’ सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सेना प्रमुख के कार्यकाल को केवल पाकिस्तान के राष्ट्रपति बढ़ा सकते हैं. अदालत ने इस पर भी गौर किया कि जब मामले पर कैबिनेट में चर्चा हुई थी तब 25 में से केवल 11 सदस्यों ने इस सेवा विस्तार को स्वीकृति दी थी.

उधर, अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर ने मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के विरोध में दलील दी कि कार्यकाल के विस्तार की घोषणा राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद की गई थी. हालांकि अदालत ने कार्यकाल विस्तार संबंधी अधिसूचना पर रोक लगा दी और आगे की कार्यवाही के लिए अगली सुनवाई तय की. सेना प्रमुख के कार्यकाल को बढ़ाए जाने के खिलाफ रईज राही नाम एक व्यक्ति ने याचिका दायर की थी. हालांकि उसने बाद में इसे वापस लेने के लिए आवेदन भी दिया था. लेकिन न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा ने इसे रद्द कर दिया.

यह पहली बार है जब पाकिस्तान शीर्ष अदालत ने शक्तिशाली सेना प्रमुख की सेवा बढ़ाने संबंधी सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाई है. सेना ने इस घटनाक्रम पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है.