सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को निर्देश दिया है कि आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्डरिंग मामले से संबंधित दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में उसके सामने पेश किये जायें ताकि उनका अवलोकन किया जा सके. पीटीआई के मुताबिक न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की पीठ ने पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही मामले में आरोपित पूर्व वित्त मंत्री की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली. उसने कहा कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जायेगा.

इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने दावा किया कि हिरासत में होने के बावजूद पी चिदंबरम महत्वपूर्ण गवाहों पर अपना ‘प्रभाव’ रखते हैं. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान निदेशालय ने 12 बैंक खातों की पहचान की है जिनमें इस अपराध से मिली रकम जमा की गयी. एजेंसी के मुताबिक उसके पास ऐसी 12 संपत्तियों का भी ब्योरा है जिन्हें कई दूसरे देशों में खरीदा गया है. प्रवर्तन निदेशालय ने पी चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध किया है. उसका दावा है कि पी चिदंबरम ने ‘निजी लाभ’ के लिये वित्त मंत्री के ‘प्रभावशाली कार्यालय’ का इस्तेमाल किया और इस अपराध की रकम को हड़प गये. निदेशालय का यह भी कहना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री होने की वजह से पी चिदंबरम की उपस्थिति ही गवाहों को भयभीत करने के लिये काफी है.

शीर्ष अदालत इस समय पी चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के 15 नवंबर के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता 74 वर्षीय पी चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत में दलील दी है कि उन्हें ‘अनुचित तरीके’ से पिछले 99 दिन से सिर्फ इसलिए जेल में रखा गया है कि वे आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्डरिंग में मुख्य आरोपित कार्ति चिदंबरम के पिता हैं और इस मामले से उन्हें जोड़ने के लिये एजेंसियों के पास ‘एक भी साक्ष्य’ नहीं है.

चिदंबरम को पहली बार आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था. इस मामले में उन्हें शीर्ष अदालत ने 22 अक्टूबर को जमानत दे दी थी. इसी दौरान 16 अक्टूबर को उन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले से मिली रकम से संबंधित मनी लॉन्डरिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया. पूर्व वित्त मंत्री इस समय 11 दिसंबर तक के लिये न्यायिक हिरासत में हैं.