विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट और कृषि क्षेत्र में पिछले साल के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन के चलते चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत रही है. एक साल पहले 2018-19 की इसी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत थी. जबकि, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 5 प्रतिशत थी.

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी जीडीपी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2019-20 में जुलाई-सितंबर के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत रही. इस तिमाही में कृषि, वानिकी और मत्स्यन पालन क्षेत्र में 2.1 प्रतिशत और खनन और उत्खनन में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी. वहीं विनिर्माण क्षेत्र में इस दौरान 1 प्रतिशत की गिरावट रही. इन तीनों समूह के खराब प्रदर्शन के कारण आर्थिक वृद्धि दर कम रही.

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में बुनियादी क्षेत्र के आठ उद्योगों का उत्पादन भी अक्टूबर में 5.8 प्रतिशत घटा है. जो आर्थिक नरमी के गहराने की ओर इशारा करता है. रिजर्व बैंक समेत दुनिया की कई एजेंसियों ने भारत में आर्थिक सुस्ती के चलते आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटा दिया है. माना जा रहा है कि चालू वित्तीय वर्ष में छह फीसदी के आसपास रह सकती है जो पहले के अनुमानों से करीब एक फीसद कम है.