कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल और बेटी प्रियंका से एसपीजी सुरक्षा वापस लिए जाने पर शिवसेना ने चिंता जताई है. पीटीआई के मुताबिक उसका कहना है कि ऐसे मामलों में राजनीतिक मतभेदों को अलग रखना चाहिए और किसी को भी किसी की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए. महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए इस सप्ताह कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिलाने वाली शिवसेना ने पूछा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय में किसे लगता है कि गांधी परिवार पर खतरा कम हो गया है. पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अनुरोध किया कि वे इस मामले पर विचार करें. नरेंद्र मोदी अभी अकेले शख्स हैं जिनके पास एसपीजी की सुरक्षा है.

केंद्र ने इस महीने की शुरुआत में गांधी परिवार का विशेष रक्षा समूह (एसपीजी) का सुरक्षा घेरा हटा दिया था. इसके बजाय उन्हें सीआरपीएफ का ‘जेड प्लस’ सुरक्षा घेरा दिया गया है. इस पर शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में कहा है, ‘चाहे दिल्ली हो या महाराष्ट्र, माहौल भय मुक्त होना चाहिए. यह शासकों की जिम्मेदारी है कि ऐसा माहौल पैदा किया जाए कि लोग भय मुक्त तरीके से काम कर सकें. जब ऐसा माहौल बन जाए तो सुरक्षा घेरा हटाने पर कोई आपत्ति नहीं होगी.’

संपादकीय में आगे कहा गया है, ‘लेकिन प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, मंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी के अन्य नेता अपना सुरक्षा घेरा हटाने के लिए तैयार नहीं हैं. बुलेटप्रूफ वाहनों की महत्ता भी कम नहीं हुई है. इसका मतलब है कि गांधी परिवार की सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे सवालों का कुछ तो आधार है.’ आगे लिखा है, ‘गांधी परिवार के काफिले में पुराने वाहन तैनात किए जाने के समाचार भी चिंताजनक हैं. अगर खतरे की घंटी बज रही है तो प्रधानमंत्री को इस मामले पर विचार करना चाहिए. ’पार्टी के मुताबिक अगर गांधी परिवार के अलावा कोई और भी होता तो तब भी वह ऐसे ही विचार व्यक्त करती.

शिवसेना ने 1984 और 1991 में गांधी परिवार से ताल्लुक रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्रियों क्रमश: इंदिरा और उनके बेटे राजीव गांधी की हत्याओं को भी याद किया जिसके बाद गांधी परिवार को एसपीजी सुरक्षा दी गई थी. पार्टी ने कहा कि 1987 में जब भारत-श्रीलंका शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए तो शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे ने भी राजीव गांधी की जान पर खतरे की बात की थी.