असम में हिरासत शिविरों में विभिन्न बीमारियों के चलते 28 लोगों की मौत हुई है. मरने वालों में केवल तीन लोग ऐसे थे जिनके पते बांग्लादेश के थे. यह जानकारी शनिवार को राज्य विधानसभा में दी गई है. पीटीआई के मुताबिक असम गण परिषद के विधायक उत्पल दत्त के सवाल के जवाब में असम के संसदीय कार्य मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 21 नवम्बर तक हिरासत शिविरों में बीमारी के चलते कुल 28 व्यक्तियों की मौत हुई है. इनमें से तीन व्यक्तियों बासुदेव बिस्वास, नागेन दास और दुलाल मियां ने अपने पते बांग्लादेश के दिये थे, जबकि बाकी 25 के दर्ज पते असम के विभिन्न जिलों के थे.

एआईयूडीएफ सदस्य अमीनुल इस्लाम द्वारा पूछे गए एक अन्य सवाल पर कि शवों को किन पतों पर भेजा गया, मंत्री ने कहा कि विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षकों से सूचना एकत्रित की जा रही है. इसके बाद कांग्रेस विधायक दुर्गा भुमजी ने जब यह पूछा कि क्या मृतकों के परिवार के सदस्यों को कोई मुआवजा दिया गया है तो पटवारी का कहना था कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

गृह प्रभार संभालने वाले मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की ओर से चंद्र मोहन पटवारी ने आगे कहा कि छह हिरासत शिविरों में अभी कुल 988 लोग और उनके 31 बच्चे हैं. इन लोगों में से 957 विदेशी घोषित हैं. उन्होंने यह भी बताया कि असम सरकार ने और हिरासत केंद्र स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है. वर्तमान में असम में छह हिरासत केंद्र हैं, जबकि एक अन्य का निर्माण गोलपाड़ा जिले में चल रहा है.

इससे पहले बुधवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में कहा था कि हिरासत केंद्रों में किसी की भी मौत भय या दवाओं की कमी के चलते नहीं हुई है और सभी मौतें किसी न किसी बीमारी के चलते हुई हैं.