केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद पर निशाना साधते हुए कहा है कि अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका की बात करने वाले लोग ‘बिखराव और टकराव का माहौल’ पैदा करने की कोशिश में हैं लेकिन समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा.

मुख्तार अब्बास नकवी ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा कि मुस्लिम समाज के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा ‘सिर्फ बाबरी नहीं, बराबरी (शिक्षा एवं सामाजिक सशक्तीकरण में) भी है.’ पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘ कुछ अलग-थलग पड़ी आवाजें हैं जो पूरे समाज की नहीं हैं. सभी वर्गों की भावना यही है कि अदालत से मामला हल हो गया है और हम आगे बढ़ना चाहिए. हमें इसमें उलझना नहीं चाहिए.’ मुख्तार अब्बास नकवी ने सवाल किया, ‘अगर वे (पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत) इतने ही गम्भीर थे तो फिर पहले ही अदालत के कहने पर समझौते के लिए सहमत क्यों नहीं हुए?’

उन्होंने कहा, ‘ये लोग बिखराव और टकराव का माहौल बनाने की कोशिश में हैं, लेकिन कोई भी समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा. आदर्श स्थिति यह होगी कि ऐसे दशकों पुराने मामले को उलझाने की कोशिश नहीं हो जिसका समाधान न्यायालय ने सर्वसम्मति के फैसले से कर दिया है.’ मंत्री ने कहा, ‘समाज के सभी वर्गों ने फैसले का सम्मान किया. लेकिन अगर कुछ लोगों को इस फैसले के बाद देश में दिखी एकता हजम नहीं हो रही है तो दुखद है.’ इस सवाल पर कि क्या मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ भूमि स्वीकार करनी चाहिए तो मंत्री ने कहा कि इस बारे में निर्णय सम्बंधित पक्षों को करना है और जहां तक अयोध्या की बात है तो वहां पहले से ही कई मस्जिदें हैं.