जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका दाखिल की है. बीते महीने शीर्ष अदालत के फैसले के बाद से यह पहली पुनर्विचार याचिका है. अपने इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन हिंदू पक्ष को देने का आदेश दिया था. उसने यह भी कहा था कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में ही किसी मुख्य जगह पर पांच एकड़ जमीन दी जाए. जमीयत के मुखिया मौलाना अरशद मदनी ने दावा किया है कि देश की मुस्लिम आबादी का ज्यादातर हिस्सा इस फैसले के खिलाफ है. उनका यह भी कहना था, ‘अदालत ने हमें इसका अधिकार दिया है और पुनर्विचार याचिका दायर की ही जानी चाहिए.’

जमीयत मुखिया का आगे कहना था, ‘इस केस में मुख्य विवाद इस पर था कि क्या मस्जिद किसी मंदिर को नष्ट करके बनाई गई. अदालत ने कहा कि इसका कोई सबूत नहीं है, इसलिए जमीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा साबित होता है. लेकिन आखिर में फैसला उल्टा निकला. चूंकि फैसला हमारी समझ में नहीं आया इसलिए हम पुनर्विचार याचिका दाखिल कर रहे हैं.’

इससे पहले कल ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी यही बात कही थी. उसका कहना था कि 90 फीसदी मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में हैं. हालांकि बोर्ड फिलहाल मामले में पक्ष नहीं बना है.