चंद्रयान 2 के लैंडर विक्रम का मलबा मिल चुका है. नासा ने अपने एक उपग्रह के जरिये इसकी तस्वीर ली. लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस तस्वीर में विक्रम का मलबा दिख रहा है, यह बात सबसे पहले नासा को एक भारतीय इंजीनियर ने बताई. ये इंजीनियर हैं चेन्नई में रहने वाले एस सुब्रमण्यम. खुद नासा ने ही यह जानकारी दी है कि उसे विक्रम के बारे में 33 साल के एस सुब्रमण्यम ने बताया.

इसी साल सितंबर में चंद्रयान 2 के लैंडर विक्रम का कमांड सेंटर से तब संपर्क टूट गया था जब वह चांद की सतह से दो किलोमीटर दूर था. नासा ने आज अपने एक उपग्रह द्वारा ली गई इसके मलबे की तस्वीर जारी की. एजेंसी के मुताबिक एस सुब्रमण्यम ने उस जगह को पहचानने में वैज्ञानिकों की मदद की जहां विक्रम गिरा था. एक बयान में नासा ने कहा, ‘सबसे पहले एस सुब्रमण्यम ने मलबे की पहचान की जो मुख्य क्रैश साइट से करीब 750 मीटर की दूरी पर था.’

नासा के मुताबिक उसने 26 सितंबर को यह तस्वीर जारी की थी और आम लोगों को न्योता दिया था कि वे पुरानी तस्वीर से इसकी तुलना कर विक्रम के बारे में बता लगाएं. एस सुब्रमण्यम ने यह काम सबसे पहले किया. इस इंजीनियर का कहना है कि नासा को लैंडर नहीं मिल पा रहा है, इस बात ने इस काम में उनकी दिलचस्पी जगा दी.

लेकिन एस सुब्रमण्यम ने यह काम कैसे किया? समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए उनका कहना था, ‘मैंने अपने दोनों लैपटॉप्स में ये तस्वीरें खोलीं और इन्हें अगल-बगल रखकर इनकी तुलना की. एक तरफ पुरानी तस्वीर थी और दूसरी तरफ नासा की नई तस्वीर.’ उन्होंने आगे बताया, ‘काम काफी मुश्किल था पर मैंने काफी कोशिश की.’ उनका कहना था कि उन्होंने चेन्नई स्थित अपने अपार्टमेंट में हर दिन सात घंटे तक इस काम में लगाए. एल सुब्रमण्यम के मुताबिक इस कवायद में ट्विटर और रेडिट पर कई लोगों ने उनकी मदद भी की. आखिरकार उन्होंने विक्रम का मलबा खोज निकाला और तीन अक्टूबर को ट्विटर पर ही इसका ऐलान भी कर दिया. इसके बाद नासा ने भी व्यापक पड़ताल की और आखिरकार दो महीने बाद वही कहा जो एल सुब्रमण्यम ने कहा था. नासा ने भी इस इंजीनियर के काम को असाधारण बताया है.