मौद्रिक नीति समीक्षा के लिये आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक शुरू हो हुई है. यह तीन दिन चलेगी. माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये नीतिगत दर में एक बार और कटौती कर सकता है.

रिजर्व बैंक अगर गुरुवार को रेपो दर में कटौती करता है तो यह इस साल नीतिगत दर में लगातार छठी बार कटौती होगी. आर्थिक वृद्धि में नरमी को देखते हुए तथा नकदी बढ़ाने के इरादे से रिजर्व बैंक इस साल नीतिगत दर में अब तक पांच बार कुल 1.35 बेसिस पाइंट्स की कटौती कर चुका है.

विनिर्माण उत्पादन में एक प्रतिशत की गिरावट के कारण जीडीपी वृद्धि दर जुलाई-सितंबर तिमाही में 4.5 प्रतिशत रही जो छह साल का न्यूनतम स्तर है. चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में यह पांच प्रतिशत थी. बैंक अधिकारियों तथा विशेषज्ञों के अनुसार आरबीआई आर्थिक वृद्धि को गति देने के इरादे से नीतिगत दर में एक बार और कटौती कर सकता है. एक बैंक अधिकारी ने अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि आरबीआई गवर्नर कह चुके हैं कि जब तक आर्थिक वृद्धि पटरी पर नहीं आती, नीतिगत दर में कटौती की जाएगी.